चंडीगढ़ः पंजाब में ईडी की कार्रवाई को लेकर सियासत माहौल गरमाया हुआ है। दरअसल, हाल ही ईडी टीम द्वारा भेजी गई चिट्ठी को लेकर मामला गरमा गया है। ऐसे में आप पार्टी के पंजाब प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईडी टीम द्वारा की जा रही लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर जमकर निशाने साधे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों के जरिए पंजाब और आम आदमी पार्टी की लीडरशिप को बदनाम करने में लगी हुई है। अमन अरोड़ा ने ईडी द्वारा भेजी गई चिट्ठी दिखाते हुए कहा कि ईडी टीम ने पंजाब पुलिस को तीसरी चिट्ठी लिखकर धारा 66(2) के तहत एफआईआर दर्ज करने को कहा है। उन्होंने बताया कि 28 अगस्त को पंजाब पुलिस ने ईडी को पत्र लिखकर केस से जुड़े दस्तावेज और सामग्री मांगी थी, ताकि सबूतों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके।
पंजाब पुलिस ने ईडी के अधिकारी को 1 सितंबर को पेश होने के लिए कहा था, लेकिन अभी तक कोई अधिकारी पेश नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पंजाब के अधिकारियों को ईडी टीम बुलाती है तो वे सहयोग करते हैं, लेकिन जब पंजाब पुलिस ने ईडी के एक अधिकारी से केस से जुड़े तथ्य मांगे तो वह उपलब्ध नहीं कराए गए। अगर खेल खेलना है तो बराबर का खेल खेला जाएगा। एक तरफ ईडी तो दूसरी तरफ पंजाब पुलिस होगी। इस तरह राज्य सरकार नहीं चलाई जाती। अमन अरोड़ा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा का मकसद पंजाब में हंगामा खड़ा करना, आम आदमी पार्टी की सीनियर लीडरशिप को उलझाए रखना और अफसरों को डराकर रखना है।
अगर अफसर डर में रहेंगे तो वे ठीक से काम नहीं कर पाएंगे। ईडी केंद्र के तोते की तरह काम कर रही है। अमन अरोड़ा ने दावा किया कि ईडी के पास कोई ठोस सबूत नहीं है। सिर्फ मीडिया के जरिए नेताओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कभी मुख्यमंत्री भगवंत मान का नाम चलाया जाता है, कभी संजीव अरोड़ा का, कभी उनका और कभी कटारूचक का नाम सामने आता है। इनके पास कुछ नहीं है। अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों पर अमन अरोड़ा ने कहा कि करीब दो महीने पहले धीर कंस्ट्रक्शन से उनका नाम जोड़कर खबरें चलाई गईं। उन्होंने एल्टस से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए कहा कि इसके सीएलयू की शुरुआत 2012 में हुई थी, जब पंजाब में अकाली दल-भाजपा की सरकार थी। इसके बाद अलग-अलग जमीनों को लेकर कई बार प्रक्रिया हुई। उस दौरान अकाली दल-भाजपा और कांग्रेस की सरकारें सत्ता में थीं। अमन अरोड़ा ने कहा कि लेआउट प्लान भी 2011 में लिया गया था और यह करीब 230 एकड़ का था।
मेरे कार्यकाल में केवल एक सीएलयू हुआ, लेकिन उसके बारे में पूरी जानकारी सामने नहीं रखी जा रही। उन्होंने दावा किया कि एल्टस से जुड़ी FIR को हाईकोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। अमन अरोड़ा ने कहा कि अगर ED को सीएलयू और लेआउट प्लान में गड़बड़ी लगती है तो उस समय के सभी जिम्मेदार लोगों से पूछताछ होनी चाहिए। 2012 से लेकर 2022 तक अकाली दल-भाजपा और कांग्रेस की सरकारें रहीं। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि उस समय यह महकमा सुखबीर बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखविंदर सिंह सरकारिया, मुख्यमंत्री भगवंत मान, अमन अरोड़ा और अब मुंडिया तक मामला पहुंचता है। तो हम सबको उठा लो, सब कुछ साफ हो जाएगा।