CHANDIGARH / MOHALI, 18 June 2026: पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को बदनाम करने, धार्मिक भावनाओं को भड़काने और पंजाब की सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचाने की कथित साजिश का खुलासा किया। दोनों नेताओं ने दावा किया कि वायरल किए गए वीडियो की दो स्वतंत्र भारत सरकार मान्यता प्राप्त फोरेंसिक लैब्स द्वारा जांच करवाई गई, जिसमें वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर स्पष्ट हो गया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान नहीं है।
नेताओं ने आरोप लगाया कि यह पूरी साजिश पंजाब सरकार द्वारा जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट, 2026 लागू करने के बाद शुरू हुई, क्योंकि कुछ ताकतें इस कानून से असहज थीं। उन्होंने कहा कि फर्जी वीडियो तैयार करने और उसे फैलाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
1,191 वीडियो फ्रेम की जांच में CM मान से नहीं मिला कोई मेल
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पिछले कई दिनों से अकाली दल के कुछ नेता एक वीडियो को मुख्यमंत्री भगवंत मान से जोड़कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि वीडियो की जांच दो स्वतंत्र फोरेंसिक प्रयोगशालाओं द्वारा की गई, जिन्होंने कुल 1,191 फ्रेम्स का विश्लेषण किया। जांच के दौरान चेहरे की बनावट, कद, शरीर की संरचना, चाल-ढाल, साइड प्रोफाइल और बैक प्रोफाइल सहित कई तकनीकी पहलुओं की पड़ताल की गई।
चीमा ने कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की लंबाई लगभग 5 फीट 10 इंच है, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की लंबाई 5 फीट 8 इंच है। इसके अलावा शरीर की बनावट, कंधों की संरचना और चेहरे की विशेषताओं में भी स्पष्ट अंतर पाया गया।
उन्होंने कहा कि दोनों लैब्स स्वतंत्र रूप से एक ही निष्कर्ष पर पहुंचीं कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान नहीं है।
अकाली दल पर साधा निशाना, बेअदबी मामलों की दिलाई याद
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि अकाली दल का इतिहास धार्मिक मुद्दों का राजनीतिक लाभ लेने से जुड़ा रहा है। उन्होंने 1986 के नकदर कांड, 2015 के बेअदबी मामलों, कोटकपूरा और बहबल कलां गोलीकांड का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाब के लोग इन घटनाओं को भूले नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि 2015 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाओं के बाद भी तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार न्याय दिलाने में विफल रही। यहां तक कि जस्टिस जोरा सिंह आयोग की रिपोर्ट पर भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
चीमा ने कहा कि अकाली दल हमेशा खुद को पंथ का रक्षक बताता रहा है, लेकिन सत्ता में रहते हुए बार-बार ऐसी घटनाएं हुईं जिनसे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने पंथ के नाम पर वोट तो लिए, लेकिन पंथक मूल्यों की रक्षा करने में असफल रही।
फर्जी वीडियो बनाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
वित्त मंत्री ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट, 2026 लागू कर बेअदबी के मामलों में उम्रकैद और भारी आर्थिक दंड का प्रावधान किया है। उन्होंने दावा किया कि इसी कानून के कारण कुछ ताकतें मुख्यमंत्री को निशाना बना रही हैं।
चीमा ने चेतावनी देते हुए कहा कि फर्जी वीडियो तैयार करने, उसे फैलाने और धार्मिक भावनाएं भड़काने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
वहीं, AAP पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा कि यह भारत के राजनीतिक इतिहास में किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को बदनाम करने की सबसे शर्मनाक कोशिशों में से एक है। उन्होंने दावा किया कि पहले इस वीडियो को पत्रकारों के बीच फैलाया गया, लेकिन जिम्मेदार पत्रकारों ने इसकी सत्यता पर सवाल उठाते हुए इसे प्रसारित करने से इनकार कर दिया।
पन्नू ने कहा कि जब मुख्यधारा के मीडिया ने वीडियो को नहीं चलाया, तो इसे अन्य माध्यमों से फैलाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी जल्द ही पंजाब के डीजीपी से मुलाकात कर पूरे मामले की व्यापक जांच की मांग करेगी।
उन्होंने कहा कि इस साजिश में शामिल हर व्यक्ति, संगठन और नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अंत में हरपाल सिंह चीमा और बलतेज पन्नू ने कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट ने वायरल वीडियो से जुड़े सभी आरोपों की हवा निकाल दी है और यह साबित कर दिया है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को बदनाम करने के लिए सुनियोजित तरीके से झूठ फैलाया गया। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग ऐसी राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेंगे जो धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास करे।
