लुधियानाः केन्द्रीय जेल अक्सर विवादों में घिरी रहती है। हाल ही में 3 जनवरी को जेल के अंदर की एक वीडियो वायरल हुई थी। जिसमें कैदी बर्थ डे पार्टी कर रहे थे। इस मामले को लेकर प्रशासन में हड़कंप मच गया। वहीं इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद चल रही जांच में प्रशासन ने एक्शन ले लिया है। इस मामले में जेल के 2 डिप्टी सुपरिन्टेंडेंट पर गाज गिरी है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार पुलिस ने डिप्टी सुपरिन्टेंडेंट गगनदीप शर्मा और सतनाम सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। खुलासा हुआ है कि दोनों आरोपी जेल बैरकों में रिश्वत लेकर कैदियों को नशा और मोबाइल सप्लाई करते हैं। दोनों UPI से रिश्वत लेते हैं। हालांकि पुलिस अधिकारी इस मामले में खुलकर कुछ बोल नहीं रहे है। जल्द ही प्रेस वार्ता के जरिए इसका खुलासा किया जा सकता है।

बताया जा रहा है कि पुलिस के सीनियर अधिकारी दोनों डिप्टी सुपरिन्टेंडेंट की गिरफ्तारी के बाद अब 19 दिन पहले जेल में हुई बर्थ डे पार्टी में इस्तेमाल हुए मोबाइल का लिंक भी इन दोनों आरोपियों से खोज रही है। बताया जा रहा है कि दोनों अधिकारी कैदियों के साथ सांठ-गांठ करके लंबे समय से अवैध गतिविधियां चला रहे थे। ये UPI के माध्यम से कैदियों के परिजनों से रिश्वत लेते थे। कैदियों से मोबाइल फोन-प्रतिबंधित वस्तुएं बरामद करने में अखबारों की खबरों में भी बने रहते थे। डिवीजन नंबर 7 की पुलिस ने जेल में बंद 4 कैदियों आशु अरोड़ा, साहिल जिंदल, राम रतन, मुख्तियार सिंह और उनके दो सहयोगी तरनतारन के गांव सरहाली के दिलप्रीत सिंह और ससराली कलां की मनदीप कौर को 17 जनवरी को गिरफ्तार किया था।
मनदीप कौर और दिलप्रीत ने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया कि वह अधिकारियों की मदद से जेल में मोबाइल फोन और ड्रग्स की तस्करी करते रहे हैं। डीसीपी देहात जसकिरणजीत सिंह तेजा ने कहा कि जांच में उन्होंने पाया कि जेल के कैदी दिलप्रीत सिंह और मनदीप कौर के माध्यम से प्रतिबंधित सामग्री और मोबाइल फोन खरीदते थे। तेजा ने कहा कि दिलप्रीत और मनदीप सिंह जेल डिप्टी सुपरिन्टेंडेंट गगनदीप शर्मा और सतनाम सिंह को मोबाइल फोन और मादक पदार्थ सौंपते थे, जो पैसे के बदले कैदियों तक पहुंचाया करते थे।
पुलिस ने जांच में पाया कि आरोपी जेल अधिकारी UPI के माध्यम से भुगतान प्राप्त करते थे। दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में अभी जांच जारी है। कई खुलासे हो सकते है। इससे पहले आरोपियों के खिलाफ डिवीजन नंबर 7 में जेल अधिनियम की धारा 52 ए (1), एनडीपीएस की धारा 21 और आईपीसी की धारा 120 बी और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब दो जेल अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ दी हैं। डीसीपी तेजा ने कहा कि मामले में और भी गिरफ्तारियां होने की उम्मीद है। पुलिस UPI लेनदेन के सबूत के तौर पर आरोपी जेल अधिकारियों के मोबाइल फोन जब्त करेगी।
