जालंधर, ENS: Shree Ram Neuro Centre Hospital में भारी हंगामा हो गया। जहां एबुलेंस कर्मी ने अस्पताल के बाउंसर पर मारपीट करने के आरोप लगाए है। इस मामले को लेकर अस्पताल में भारी हंगामा हो गया। एबुलेंस कर्मी ने कहाकि बीते दिन मरीज की हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने परिवार को डीएमसी अस्पताल लुधियाना में रैफर कर दिया। इस मामले में एबुलेंस कर्मी ने मरीज के परिजनों के कहने पर मरीज को निजी अस्पताल में छोड़ने को लेकर अस्पताल के डॉक्टर और बाउंसरों पर मारपीट के आरोप लगाए है।
वहीं मामले की जानकारी देते हुए डॉक्टर ने कहा कि बीते दिन मरीज की तबीयत ज्यादा खराब होने के कारण उसे एबुलेंस चालक द्वारा रास्ते में निजी अस्पताल में दाखिल करवा दिया। इस मामले की सूचना अस्पताल में डॉक्टरों को मिल गई थी। इस दौरान उसे कई बार फोन करके बुलाने की कोशिश की गई। वहीं देर शाम डॉक्टर दीपांशु ने उसे फोन करके बुलाया। जहां डॉक्टर ने उसे रास्ते में कमिशन लेकर मरीज की जान को खतरे में डालने के लिए वह निजी अस्पताल में छोड़ आया, जहां मरीज का उस अस्पताल में ईलाज नहीं हो पाना था।
इस दौरान जब अस्पताल में डॉक्टर ने पूछा तो पहले वह मानने से मना करता रहा। जिसके बाद महिला डॉक्टर ने उसे थोड़ा सा हिलाकर पूछा तो कर्मी ने माना कि 2 से 3 हजार रुपए के लिए मरीज की जान खतरे में डालकर उसे निजी अस्पताल में छोड़कर आ गया। इस दौरान मामले की धीरे-धीरे कई परतें खुली। उन्होंने कहा मामले को लेकर एसीपी रूपकौर को दे दी है, वहीं पुलिस कमिश्नर को भी शिकायत दे दी है। उनका कहना है कि यह उनके अस्पताल में नहीं बल्कि कई अस्पतालों ने यह नेक्सेस चल रहा है। वहीं डीएमसी में अस्पताल की कमिशन को लेकर डॉक्टर ने कहा कि बड़े अस्पताल में किसी डॉक्टर की कमिशन नहीं होती।
ऐसे में अगर मरीज के साथ कोई घटना हो जाती है तो अस्पताल के नाम को ध्यान में रखते हुए उसे अस्पताल में बुलाया गया। पूछताछ में कई परतें खुलने पर पता चला कि कुछ अन्य 2 व्यक्तियों द्वारा घर में जाकर मरीजों की देखभाल करने की बात सामने आई। अस्पताल प्रबंधक द्वारा गंभीर मामले को देखते हुए एबुलेंस कर्मी को टर्मिनेट कर दिया गया। जिसके बाद देर रात इस मामले की शिकायत पुलिस को दे दे गई है। उन्होंने बाउंसरों द्वारा कर्मी को पीटने के मामले को खारिज कर दिया है।
