जालंधर, ENS: पंजाब स्वास्थ्य विभाग के नए निदेशक (PHSC) ने जालंधर के सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं और जारी मरम्मत कार्यों का जायजा लिया। लगभग 15 दिन पहले अस्पताल के एक वार्ड में आग लग गई थी, जिसके बाद से वह पूरी तरह बंद पड़ा था। मौके पर पहुंचे निदेशक ने सिविल सर्जन, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (DMC), एसएमओ (SMO) और अस्पताल के वरिष्ठ प्रशासनिक अमले के साथ प्रभावित वार्डों और आपातकालीन विभाग का निरीक्षण किया। उन्होंने ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि मरम्मत और लाइटों की वायरिंग का काम अगले 7 दिनों के भीतर हर हाल में पूरा करके वार्ड को मरीजों के लिए दोबारा चालू किया जाए।
निरीक्षण के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए निदेशक ने कहा कि 15 दिन पहले के मुकाबले अस्पताल में सुधार की गति काफी तेज हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक दिन में व्यवस्थाएं नहीं बदलतीं, लेकिन सरकार और प्रशासन लगातार प्रयासरत हैं। अस्पताल कर्मचारियों द्वारा दी गई धमकी के आरोपों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी को कोई चेतावनी या धमकी नहीं दी है, बल्कि पूरे स्टाफ और मरीजों को अपने परिवार का सदस्य मानते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि तय किए गए एक हफ्ते के समय में काम पूरा नहीं हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल में बेड की घटती क्षमता और एनजीओ (NGOs) को दी जा रही सुविधाओं के सवाल पर निदेशक ने कहा कि वह एक महीने पहले ही इस पद पर आए हैं और यह मामला उनके ध्यान में आया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अस्पताल के विस्तार के लिए राज्य सरकार के पास फंड की कोई कमी नहीं है और प्राथमिकता के आधार पर नए बेड तथा बुनियादी ढांचा बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही, पिछले काफी समय से खराब पड़ी बिजली की तारों और लाइटिंग की समस्या को हल करने के लिए मौके पर मौजूद एसडीओ (SDO) को एक सप्ताह के भीतर नया कनेक्शन चालू करने के निर्देश दिए गए, ताकि मरीजों को किसी तरह की असुविधा न हो।