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Cambridge Co-education School की रद्द हो सकती है मान्यता

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जालंधर, (वरुण) : महानगर के चर्चित स्कूल कैम्ब्रिज को-एजुकेेशन स्कूल की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही। हाल ही में विवादों में आए गढ़ा रोड में छोटी बारादरी स्थित कैम्ब्रिज को-एजुकेेशन स्कूल की एक बार फिर से मुश्किलें बढ़ गई है। दरअसल, कुछ दिन पहले ही छोटी बारादरी स्थित कैम्ब्रिज को-एजुकेेशन स्कूल की एक शिकायत सामने आई थी जिसमें एक स्पेशल बच्चे को पढ़ाई करवाने की फीस ऐंठने के मामले में शिक्षा विभाग ने प्रबंधन को गलत ठहराया था। विभाग की ओर से इस मामले को लेकर 6 जुलाई तक जवाब मांगा गया था। लेकिन स्कूल प्रशासन की ओर से जवाब न मिलने पर शिक्षा विभाग ने 3 दिन का अल्टीमेटम दे दिया है, साथ ही जवाब ना दिए जाने के पश्चात एनओसी रद्द की कार्यवाही करने की चेतावनी दी है।

ये है मामला

छोटी बारादरी स्थित कैम्ब्रिज को-एजुकेेशन स्कूल के प्रबंधन ने आटिस्म की बीमारी से पीड़ित युवक को बीते कई सालों से फीस के नाम पर ठगा। जब पीड़ित के परिजनों की ओर द्वारा फीस लौटाने की बात सामने आई तो प्रबंधन की ओर से वसूली गई फीस भी लौटाने से इंकार किया गया। कैम्ब्रिज स्कूल प्रबंधन का यह मामला जब शिक्षा विभाग के पास गया। शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को दोषी ठहराकर तत्काल स्टूडैंट के भविष्य की रक्षा यकीनी बनाने का आदेश जारी किया। लेकिन प्रबंधन ने शिक्षा विभाग के आदेश को दरकिनारे कर दिया। जिसके बाद अब शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को दोबारा चेतावनी पत्र जारी कर दिया है। अगर प्रबंधन इस बार भी शिक्षा विभाग को इस जारी पत्र का जवाब नहीं देंगा तो शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल की एनओसी रद्द की जा सकती है। 

पीड़ित उप्पल ने स्कूल प्रबंधन को जारी किया लीगल नोटिस 

उधर, पीड़ित बच्चे के पिता पराग उप्पल ने बताया कि उनके बेटा रितेश उप्पल आटिस्म बीमारी से ग्रस्त है। उन्होंने बताया कि प्रबंधन की ओर से वसूली गई फीस भी लौटाने से इंकार कर दिया गया है। जिसके बाद उन्होंने अब स्कूल प्रबंधन को लीगल नोटिस जारी कर कानूनी रूख अख्तियार कर लिया है। उप्पल ने बताया कि अपने वकील के जरिए भेजे नोटिस में उन्होंने स्कूल को वसूली 9 लाख रुपए से ज्यादा की फीस तथा 40 लाख रुपए के मुआवजे की मांग की है। 

इस मामले को लेकर स्कूल प्रबंधन ने साधी चुप्पी

दूसरी ओर स्कूल प्रबंधन से इस मामले को लेकर जब मीडिया ने बात करनी चाही तो प्रबंधन ने इस मामले को लेकर चुप्पी साध ली हुई है। स्कूल प्रबंधन अब मीडिया से दूरी बना रहा है। खुरला किंगरा रोड जालंधर निवासी स्पेयर पार्ट्स व्यापारी उप्पल ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे रितेश उप्पल को स्कूल में शिक्षा के लिए दाखिल करवाया था। स्कूल प्रबंधन को दाखिले के समय ही सारी जानकारी दे दी गई थी कि वो आटिस्म बीमारी से पीड़ित है। उप्पल ने बताया कि स्कूल प्रबंधन ने उनको आश्वस्त किया था कि उनका बेटा 12वीं कक्षा तक पढ़ाई कर सकता है। इस आधार पर उन्होंने 9वीं कक्षा तक उसकी पूरी फीस स्कूल भी अदा कर दी, लेकिन अचानक 10वीं कक्षा में आने पर उनको स्कूल प्रबंधन ने बेटे रितेश को 10वीं कक्षा में प्रमोट करने से इंकार कर दिया। 

शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को जारी किया चेतावनी पत्र 

उप्पल ने बताया कि कारण जानने पर पता चला कि स्कूल प्रबंधन ने उनके बेटे के नाम राज्य के शिक्षा विभाग के ई-पोर्टल (ई-पंजाब) पर रजिस्टर्ड ही नहीं किया था जोकि 7वीं कक्षा के दौरान ही हो जाना चाहिए था। प्रबंधन से इस मामले को लेकर संपर्क किया गय तो उन्होंने इस मामले को लेकर टाल-मटोल करना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद स्कूल प्रबंधन ने बेटे को स्कूल में प्रवेश से भी इंकार कर दिया। जिससे बेटे को मानसिक तौर पर गहरा आघात पहुंचा। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी की ओर से जिला शिक्षा विभाग के सम्मुख शिकायत पेश की गई जिसकी जांच में गत माह स्कूल प्रबंधन को कोताही का दोषी ठहराया गया और बेटे का नाम ई-पोर्टल पर रजिस्टर्ड करने का आदेश दिया गया लेकिन उसके बाद भी जब स्कूल प्रबंधन ने आदेश का पालन नहीं किया। जिसके बाद अब शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को चेतावनी पत्र भी जारी किया। 

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