धर्म: हिंदू धर्म में गुरु को सबसे ऊंचा स्थान दिया गया है। गुरुओं का सम्मान भगवान के रुप में माना जाता है। इसलिए बच्चों को भी हमेशा यही सिखाया जाता है कि उनका हमेशा सम्मान और आदर करना चाहिए। छोटे बच्चों को भी यही शिक्षा दी जाती है कि अपने शिक्षक के प्रति श्रद्दा और विनम्रता रखें। इसी श्रद्धा के कारण छात्र अपने शिक्षकों को पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेते हैं परंतु समय-समय पर यह भी प्रश्न उठता है कि क्या किसी के पैर छने से उनका पुण्य पर कोई असर पड़ता है।
टीचर ने किया प्रेमानंद महाराज से सवाल
एक महिला टीचर ने प्रेमानंद महाराज से इसी मुद्दे पर सवाल किया। उन्होंने बताया कि कई बार उनके छात्र आदर दिखाने के लिए उनके पैरों को छूते हैं। उन्होंने कई बार मना भी किया है परंतु बच्चे बिल्कुल भी नहीं मानते। इस बात को लेकर उन्हें चिंता भी थी कि कहीं उनके पुण्य पर इसका उलट असर तो नहीं होगा। इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि – आमतौर पर बिना ध्यान के किसी के पैर छूने से पुण्य पर असर हो सकता है परंतु इसका आसान और आध्यात्मिक तरीका भी है।
उनका कहना है कि यदि टीचर अपने मन में भगवान को याद करते हुए बच्चे को प्रणाम कर ले तो पुण्य सुरक्षित रहता है। हर व्यक्ति में भगवान का अंश होता है इसलिए किसी से अपने पैरों का संपर्क बिना सोचे-समझे नहीं होना चाहिए।
श्रद्धा और सम्मान दोनों रखना संभव है
महाराज ने यह भी बताया कि श्रद्धा और सम्मान दोनों की ही बनाकर रखना बिल्कुल संभव है। यदि कोई व्यक्ति आपके मना करने के बाद आपको आदर के साथ प्रणाम करता है और आपके पैर छूता है तो आप अपने मन में भगवान को याद करते हुए उसे प्रणाम कर दें। इससे आपका पु्ण्य सुरक्षित रहेगा और सामने वाले को भी सम्मान मिलेगा।
वहीं आध्यात्मिक तौर पर श्रद्धा और पुण्य दोनों एक साथ बनाकर रखे जा सकते हैं। गुरु को हमेशा आदर ही देना चाहिए लेकिन साथ ही अपने मन को शांति और पुण्य की सुरक्षा भी जरुरी है। हर इंसान में भगवान रहते हैं ऐसे में हमेशा विनम्र और सजग होकर ही व्यवहार करना चाहिए।