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अभेद्य हुआ भारत का सुरक्षा कवचः दुश्मन की इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों को सेना हवा में ही करेगी नष्ट

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नई दिल्लीः भारत ने 24 घंटे के भीतर बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और एंटी-शिप मिसाइलों का सफल परीक्षण कर इतिहास रच दिया है। अब 5,000 किमी तक की रेंज वाली दुश्मन की मिसाइलें हवा में ही नष्ट हो जाएंगी।

भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने रक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों के ‘एलीट क्लब’ में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से बचाव करने की अचूक क्षमता है। भारत ने 10 और 11 जून को लगातार तीन मिसाइलों के सफल उड़ान परीक्षण किए, जिनमें बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) के साथ-साथ एंटी-शिप मिसाइल टेक्नोलॉजी भी शामिल है। ये मिसाइलों का भारत ने सफल परीक्षण किया है।
आपका बता दें कि अब 5000 किमी तक की रेंज वाली दुश्मन की मिसाइलें हवा में ही नष्ट हो जाएंगी।

सूत्रों ने बताया कि DRDO ने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस को इतनी उच्च प्राथमिकता इसलिए दी है, क्योंकि पड़ोसी देश पाकिस्तान मल्टीपल वॉरहेड वाली लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा है। इसमें फतेह-I, फतेह-II और चीन मूल की P282 मिसाइलें शामिल हैं। भारत की यह नई तैयारी पाकिस्तान के इन्हीं मंसूबों का करारा जवाब है।

परीक्षण के दौरान मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने अपने तय किए लक्ष्यों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया और उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया। यह सफलता भविष्य के उन्नत मिसाइल खतरों से निपटने के लिए देश की रक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाती है।

शीर्ष सरकारी सूत्रों के मुताबिक, DRDO ने दो ऐसे इंटरसेप्टर मिसाइलों का परीक्षण किया है, जो 2,000 किमी से 5,000 किमी के बीच मार करने वाली दुश्मन की इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों (IRBMs) को निष्क्रिय करने में पूरी तरह सक्षम हैं। ये इंटरसेप्टर ‘एक्सो-एटमॉस्फेरिक’ (वायुमंडल के बाहर) और ‘एंडो-एटमॉस्फेरिक’ (वायुमंडल के भीतर) दोनों ही तरह के हैं। केंद्र सरकार ने फिलहाल इन इंटरसेप्टर्स के नाम उजागर नहीं किए हैं। परीक्षण पूरे होने के बाद अब इन्हें जल्द ही सेना द्वारा ‘यूजर ट्रायल्स’ के लिए भेजा जाएगा।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने इन मिशनों की बारीकी से निगरानी की। उन्होंने 24 घंटे के भीतर इतने जटिल परीक्षणों को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए DRDO के वैज्ञानिकों, उद्योग भागीदारों और सशस्त्र बलों के शानदार तालमेल की तारीफ की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस ऐतिहासिक कामयाबी पर DRDO को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि हवाई और समुद्री खतरों का मुकाबला करने में देश की रक्षा तैयारियों को बेहद मजबूत करेगी।

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