चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मौजूदा हरियाणा राज्य स्टार्टअप नीति 2022 में व्यापक पूरक प्रावधान को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य राज्य में स्टार्टअप प्रणाली को और मजबूत करना, नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना, स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना तथा उभरते उद्यमियों को बेहतर वित्तीय एवं संस्थागत सहायता उपलब्ध कराना है।
यह पूरक प्रावधान संकल्प पत्र के तहत की गई वित्त वर्ष 2025-26 के बजट भाषण की विभिन्न घोषणाओं, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री के निर्देशों तथा मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा विभिन्न राज्य स्तरीय कार्यक्रमों और स्टार्टअप एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ संवाद के दौरान की गई घोषणाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य नीति के तहत अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना तथा स्टार्टअप को उनके विकास के विभिन्न चरणों में अधिक प्रभावी सहायता प्रदान करना है।
स्कूल स्तर पर नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थियों के बीच 10,000 ‘डू-इट-योरसेल्फ’ (डीआईवाई) किट वितरित की जाएंगी। हरियाणा में एक विश्वस्तरीय इन्क्यूबेटर ‘एच-हब’ भी स्थापित किया जाएगा। इसे राज्य के प्रमुख स्टार्टअप, कॉरपोरेट और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विकसित किया जाएगा। यह इन्क्यूबेटर स्टार्टअप को आधुनिक सुविधाएं और उनके उद्यमों को विस्तार देने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा।
सरकारी खरीद में स्टार्टअप के लिए अधिक अवसर पैदा करने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार अपनी वार्षिक विभागीय खरीद का 10 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा आधारित पात्र स्टार्टअप के लिए आरक्षित करेगी। इसके अलावा, हरियाणा में कार्यरत कॉरपोरेट कंपनियों को राज्य आधारित स्टार्टअप के साथ पायलट परियोजनाएं शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए 10 लाख रुपये तक की मैचिंग ग्रांट दी जाएगी, बशर्ते संबंधित कॉरपोरेट कंपनियां ऐसी पायलट परियोजनाओं को स्टार्टअप के साथ अनुबंध में परिवर्तित करें।
मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर एक अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान के अनुसार, चंडीगढ़ में पंजीकृत कार्यालय वाले स्टार्टअप को भी श्रेणी-2 स्टार्टअप माना जाएगा। इससे वे हरियाणा स्टार्टअप नीति के तहत उपलब्ध लाभ प्राप्त करने के पात्र होंगे।