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IIIT ऊना ने बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड, एआईसीटीई समर्थन् इंटर्नशिप में देशभर में सबसे अधिक सहभागिता

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ऊना,सुशील पंडित: भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) ऊना ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करते हुए एआईसीटीई समर्थन्: इंटर्नशिप कनेक्ट कार्यक्रम 2026–27 में देशभर में सर्वाधिक सहभागिता का रिकॉर्ड बनाया है। संस्थान में एक माह तक चले इस शोध-आधारित इंटर्नशिप कार्यक्रम का बुधवार को भव्य समापन समारोह के साथ समापन हुआ।

 15 जून से 15 जुलाई तक आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन योजना (PM-USPY) के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को अनुसंधान, नवाचार और अत्याधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।

एआईसीटीई समर्थन् योजना के तहत 100-100 सीटों वाले चार चयनित संस्थानों—आईआईआईटी ऊना, एनआईटीटीटीआर भोपाल, आईआईआईटी भागलपुर और आईआईआईटीडीएम—में आईआईआईटी ऊना ने 70 प्रशिक्षुओं के नामांकन के साथ राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक सहभागिता दर्ज की। इस उपलब्धि के साथ संस्थान ने इस योजना में भाग लेने वाले सभी आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी और अन्य मेजबान संस्थानों को पीछे छोड़ दिया।

इस कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पूर्वोत्तर राज्यों के विद्यार्थी शामिल हुए, जो देशभर के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत हैं। इससे आईआईआईटी ऊना की बढ़ती राष्ट्रीय पहचान और मजबूत शोध वातावरण का भी पता चलता है।

इंटर्नशिप के दौरान विद्यार्थियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), क्वांटम कंप्यूटिंग, डेटा साइंस, लो-पावर वीएलएसआई डिज़ाइन, सिग्नल प्रोसेसिंग, फेडरेटेड लर्निंग, बायोमेडिकल सिग्नल प्रोसेसिंग, बायोइन्फॉर्मेटिक्स, पार्टिकल फिजिक्स और साइबर सुरक्षा जैसे आधुनिक शोध क्षेत्रों में कार्य किया। साथ ही उन्हें Python, R, MATLAB और Simulink जैसे सॉफ्टवेयर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

प्रतिभागियों ने EduNavigate AI, InternMe, KisanMitra, Catch-Up Immunization Engine और मूक-बधिरों के लिए कैमरा आधारित हैंड जेस्चर रिकॉग्निशन सिस्टम जैसी नवाचारी परियोजनाएं विकसित कीं। इसके अलावा क्वांटम आधारित EEG वर्गीकरण और बायोमेडिकल सिग्नलों से शोर हटाने पर आधारित दो शोध-पत्र भी तैयार किए गए।

समापन समारोह में आईआईआईटी ऊना के निदेशक प्रो. मनीष गौर ने प्रशिक्षुओं को बधाई देते हुए कहा कि शोध इंटर्नशिप विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करती है तथा उन्हें उच्च शिक्षा और उद्योग जगत में बेहतर अवसरों के लिए तैयार करती है। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. तनु वाधेरा ने किया। कार्यक्रम की सफलता में संस्थान के विभिन्न संकाय सदस्यों और मार्गदर्शकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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