ऊना,सुशील पंडित: उत्कृष्ट शोध और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग के क्षेत्र में अपनी बढ़ती पहचान को आगे बढ़ाते हुए भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) ऊना में आज इंटीग्रेटेड सर्किट्स, कम्युनिकेशन एंड कंप्यूटिंग सिस्टम्स (ICIC3S 2026) के दूसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। आईईईई दिल्ली सेक्शन के तकनीकी सहयोग से आयोजित यह दो दिवसीय सम्मेलन 7–8 अगस्त तक चलेगा। सम्मेलन के लिए दुनिया भर से 1,054 शोध-पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से कठोर समीक्षा प्रक्रिया के बाद केवल 115 शोध-पत्र प्रस्तुतिकरण के लिए चुने गए। इस प्रकार सम्मेलन की स्वीकृति दर मात्र 11 प्रतिशत रही।
उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. संजय मिश्रा, पूर्व वरिष्ठ सलाहकार, जैव प्रौद्योगिकी विभाग तथा सलाहकार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार, थे। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर एवं आईईईई दिल्ली सेक्शन की सचिव-सह-कोषाध्यक्ष प्रो. स्नेहा काबरा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता आईआईआईटी ऊना के निदेशक प्रो. मनीष गौर ने की।
समारोह का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद मुख्य अतिथियों एवं सम्मेलन के प्रायोजकों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर अतिथियों ने ICIC3S 2026 एब्स्ट्रैक्ट बुक का भी लोकार्पण किया, जिसमें सम्मेलन में प्रस्तुति के लिए चयनित शोध-पत्रों के सार संकलित हैं।
अपने संबोधन में प्रो. मनीष गौर ने कहा कि आईसीआईसी3एस का दूसरा संस्करण संस्थान के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि बहुत कम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सफलतापूर्वक दूसरे संस्करण तक पहुँच पाते हैं। उन्होंने इस सम्मेलन को प्रतिवर्ष आयोजित करने की संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई तथा आईईईई दिल्ली सेक्शन का निरंतर तकनीकी सहयोग और संस्थान पर विश्वास बनाए रखने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का विषय आज की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप है, जहाँ संचार, कंप्यूटिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स का एकीकरण नई तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. स्नेहा काबरा ने सम्मेलन की 11 प्रतिशत स्वीकृति दर को इसकी उच्च गुणवत्ता और कठोर समीक्षा प्रक्रिया का प्रमाण बताया। उन्होंने बताया कि आईईईई के लगभग 90 देशों में पाँच लाख से अधिक सदस्य हैं। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को पेशेवर संगठनों से जुड़कर सहयोगात्मक शोध को बढ़ावा देने तथा हाल ही में स्थापित आईईईई स्टूडेंट ब्रांच, आईआईआईटी ऊना के माध्यम से अपने नवाचारों को समाज के हित में उपयोगी तकनीकों में बदलने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य अतिथि डॉ. संजय मिश्रा ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय और सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए बहुविषयक तथा अनुप्रयोग-आधारित शोध की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के उदाहरण देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकों में इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार और कंप्यूटिंग का समन्वय लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने शोधकर्ताओं से पारंपरिक विषयगत सीमाओं से आगे बढ़कर राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप स्वदेशी तकनीकों के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।
सम्मेलन का आयोजन कॉन्फ्रेंस चेयर डॉ. अंकुर कुमार और डॉ. नमन गर्ग के नेतृत्व में किया जा रहा है। अपने स्वागत संबोधन में डॉ. अंकुर कुमार ने बताया कि इस वर्ष सम्मेलन को बिना अंतिम तिथि बढ़ाए 1,054 शोध-पत्र प्राप्त हुए, जो इसकी बढ़ती शैक्षणिक प्रतिष्ठा का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन के दौरान दस तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने हाल ही में स्थापित आईईईई स्टूडेंट ब्रांच, आईआईआईटी ऊना का भी उल्लेख किया, जिसके अंतर्गत “माइक्रो फ्यूज़न: हार्डवेयर इनोवेशन चैलेंज” और “कोड क्वेस्ट: टीम कोडिंग कॉन्टेस्ट” जैसी छात्र प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा रही हैं, ताकि विद्यार्थियों में नवाचार और व्यावहारिक सीखने को बढ़ावा मिल सके। उद्घाटन सत्र का समापन डॉ. नमन गर्ग के समापन संबोधन के साथ हुआ।
उन्होंने आईईईई दिल्ली सेक्शन, सम्मेलन के प्रायोजकों, मुख्य वक्ताओं, प्रतिनिधियों, समीक्षकों, स्वयंसेवकों तथा सम्मेलन के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी लोगों का उनके अमूल्य सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और ICIC3S 2026 की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएँ दीं। अगले दो दिनों में सम्मेलन के दौरान प्रमुख व्याख्यान, आमंत्रित व्याख्यान और तकनीकी शोध-पत्र प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाएँगी। यह सम्मेलन शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों को इंटीग्रेटेड सर्किट्स, संचार और कंप्यूटिंग तकनीकों के क्षेत्र में विचार-विमर्श, ज्ञान साझा करने और नए सहयोग विकसित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।