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शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने की अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस

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शिमला: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने आज यहां एक प्रेस-वार्ता के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता जगत प्रकाश नड्डा के बयानों का खंडन किया। हिमाचल प्रदेश की जनता राजनीतिक द्वेष से प्रेरित निरर्थक बयानबाजी के बजाय तथ्यों और ठोस उपलब्धियों पर चर्चा की उम्मीद करती है।

जे.पी. नड्डा हिमाचल प्रदेश से संबंध रखने वाले केंद्र सरकार के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और एक महत्वपूर्ण पद पर आसीन हैं, इसलिए राज्य की जनता की उनसे अपेक्षाएं स्वाभाविक रूप से अधिक हैं। लोग चाहते हैं कि प्रदेश हित के मुद्दे, वित्तीय हितों और विकास संबंधी प्राथमिकताओं की राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी पैरवी हो।जब-जब केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय रहा है, हिमाचल प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य में स्थापित प्रमुख शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य सुविधाएं और विकास परियोजनाएं केंद्र में कांग्रेस सरकारों के दौरान स्थापित किए गए थे।

आज हिमाचल प्रदेश को उसी उदार सहयोग की आवश्यकता है, विशेषकर ऐसे समय में जब राज्य वित्तीय दबाव, पुनर्निर्माण की चुनौतियों और बढ़ती विकासात्मक जरूरतों का सामना कर रहा है। वर्तमान में राज्य के सामने सबसे बड़ी चिंता राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) का बंद होना है, जो संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता तंत्र रहा है। दशकों तक विभिन्न वित्त आयोगों ने पर्वतीय राज्यों की विशेष चुनौतियों को स्वीकार करते हुए इस सहायता की अनुशंसा की थी। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद होने से राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 8,100 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में निवेश पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

वर्ष 2023 में आई प्राकृतिक आपदा ने हिमाचल प्रदेश में भारी तबाही मचाई। सड़कों, पुलों, स्कूलों, जलापूर्ति योजनाओं, स्वास्थ्य संस्थानों और अन्य सार्वजनिक ढांचों को भारी नुकसान हुआ, जिससे हजारों करोड़ रुपये की क्षति हुई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए केंद्र से कई बार अतिरिक्त सहायता की मांग की, लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की राशि अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।

स्वास्थ्य क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में वित्तपोषण को लेकर किए जा रहे दावों और राज्य को वास्तव में प्राप्त सहायता के बीच बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए आयुष्मान भारत योजना में 90ः10 की फंडिंग व्यवस्था का उल्लेख किया जाता है, लेकिन वर्ष 2025-26 में लगभग 155 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य दावों के मुकाबले हिमाचल प्रदेश को केंद्र से केवल 49 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए।

इससे योजना के अंतर्गत वास्तविक सहायता को लेकर प्रश्न उठते हैं। वर्ष 2018-19 से 2025-26 के बीच स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत उपचार संबंधी दावे लगभग 599 करोड़ रुपये रहे। इस दौरान लाभार्थियों को निर्बाध उपचार उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार को अपने संसाधनों से अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ा। वित्तीय चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार ने हाल ही में हिमकेयर योजना की लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए 100 करोड़ रुपये जारी किए हैं, ताकि अस्पतालों और मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

मंत्रियों ने कहा कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम चला रही है। लगभग 3,000 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य अवसंरचना का विकास किया जा रहा है। अटल सुपर स्पेशियलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना, आईजीएमसी शिमला तथा डॉ. राजेंद्र प्रसाद चिकित्सा महाविद्यालय टांडा में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त रोबोटिक सर्जरी, पीईटी स्कैन, आधुनिक कैंसर उपचार सुविधाएं, ट्रॉमा सेंटर और उन्नत डायग्नोस्टिक तकनीकों का विस्तार भी किया जा रहा है।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है और देश का अग्रणी राज्य बनकर उभर रहा है। हाल ही में जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2.0 में हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर छठा स्थान तथा सभी राज्यों में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। राज्य को प्रतिष्ठित ‘प्रचेष्ठा-2’ श्रेणी में स्थान मिला है।

मंत्रियों ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की। हिमाचल प्रदेश लगातार अपने वाजिब हितों से जुड़े विषयों को उठाता रहा है और जल संसाधनों, विद्युत लाभों तथा वित्तीय हितों से संबंधित मामलों पर निरंतर ध्यान दिए जाने की अपेक्षा करता है। राज्य को उम्मीद है कि उसके वाजिब अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए अधिक प्रभावी समर्थन मिलेगा।

हिमाचल प्रदेश सरकार किसी विशेष रियायत की मांग नहीं कर रही है, बल्कि केवल वही चाहती है जो संविधान, कानून और वित्तीय व्यवस्था के अनुसार राज्य की जनता का अधिकार है। उन्होंने कहा कि एक पर्वतीय राज्य होने के कारण हिमाचल प्रदेश को अपनी विशिष्ट चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर सहयोग, समय पर वित्तीय सहायता और केंद्र सरकार की वास्तविक साझेदारी की आवश्यकता है। राज्य की जनता ठोस परिणाम, प्रभावी सहयोग और दीर्घकालिक विकास एवं समृद्धि के प्रति साझा प्रतिबद्धता की अपेक्षा रखती है।

राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ नेताओं को ऐसी नकारात्मक या भ्रामक टिप्पणियों से बचना चाहिए जो राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाती हों। जगत प्रकाश नड्डा से आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र सरकार में अपने प्रभाव का उपयोग हिमाचल प्रदेश के लिए अधिक वित्तीय सहायता, आपदा राहत तथा विकासात्मक परियोजनाएं सुनिश्चित करने के लिए करें।

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