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मुख्यमंत्री ने खोले विकास के नए द्वार, 9 परियोजनाओं से बागवानी क्षेत्र को मिलेगा बल

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चंडीगढ़: हरियाणा सरकार प्रदेश में कृषि के साथ-साथ बागवानी क्षेत्र को भी विकास का मजबूत आधार बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन देने तथा आधुनिक तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने के उद्देश्य से राज्यभर में बागवानी अनुसंधान, उत्कृष्टता केंद्रों और तकनीकी परियोजनाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को झज्जर के रईया में 13.27 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक बागवानी अनुसंधान केंद्र तथा मुनीमपुर बादली में 8.50 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित बीज उत्पादन प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये दोनों परियोजनाएं किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी तथा प्रदेश में बागवानी क्षेत्र को नई गति प्रदान करेंगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 53.60 करोड़ रुपये की लागत से तैयार सात अन्य विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन कर उन्हें आमजन को समर्पित किया। इनमें झज्जर लघु सचिवालय एवं आवासीय परिसर, विभिन्न गांवों के राजकीय विद्यालयों के नए भवन तथा सौंधी और निमाना गांवों के लिए जलघर परियोजना शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से शिक्षा, पेयजल, प्रशासनिक सेवाओं और जन सुविधाओं को मजबूती मिलेगी तथा क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा प्राप्त होगी। कार्यक्रम में विशेष अतिथि इजरायल के राजदूत रूवेन अजार एवं उनकी धर्मपत्नी रेचल अजार, हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा, भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओम प्रकाश धनखड़, डॉ सारा ओलगा, प्रथम सचिव, इजरायल दूतावास, बहादुरगढ़ के विधायक राजेश जून तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजेंद्र कुमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि संयोगवश आज यह महत्वपूर्ण अवसर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती के दिन आया है। उन्होंने महाराणा प्रताप को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन साहस, स्वाभिमान, त्याग और अटूट संकल्प का प्रतीक है। महाराणा प्रताप के आदर्श आज भी हमें कठिन चुनौतियों के बीच दृढ़ता और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उपस्थित जन को विकसित भारत के संकल्प पथ पर अपना समर्पित योगदान देने की शपथ भी दिलाई।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बादली विधानसभा क्षेत्र को दी विकास परियोजनाओं की सौगात

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने बादली विधानसभा क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, सिंचाई एवं ग्रामीण विकास को नई गति देने का संकल्प दोहराया। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ द्वारा क्षेत्र के विकास को समर्पित मांग पत्र पर घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल के गांव रईया स्थित क्षेत्रीय उत्कृष्टता एवं अनुसंधान केंद्र में झज्जर जिले के बागवानी उत्पादों एवं औषधीय पौधों पर अनुसंधान के लिए एक विशेष रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा। इससे क्षेत्र के किसानों को आधुनिक तकनीक और अनुसंधान आधारित खेती का लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए बादली गांव में 50 बेड का आधुनिक अस्पताल बनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त गांव बुपनिया में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए जाएंगे। खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गांव भिंडावास में आदर्श खेल स्टेडियम स्थापित किया जाएगा। वहीं माछरौली में बीडीपीओ कार्यालय भवन के निर्माण के लिए 5.87 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि बादली विधानसभा क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की 70 किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण पर 52 करोड़ रुपये तथा हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की 25 सड़कों के नवीनीकरण पर 15 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा बादली गांव के उत्तरी बाईपास को फोर लेन बनाने के लिए 30 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।किसानों की सुविधा के लिए बादली में फसल खरीद केंद्र स्थापित करने हेतु 3 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। साथ ही गांव पाटौदा में भूमि उपलब्ध होते ही फसल खरीद केंद्र का निर्माण किया जाएगा। जल निकासी और सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए गांव खेड़ी जट्ट, एमपी माजरा, बादली, पेलपा और पाहसौर से गुजरने वाली ड्रेन को पक्का करने पर 1.60 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं गांव गिरधरपुर, ढाकला और चांदौल सहित आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ के पानी की निकासी के लिए ड्रेन नंबर-8 तक पाइप लाइन बिछाने हेतु 1.75 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। महाग्राम योजना के अंतर्गत बादली और एमपी माजरा में सीवरेज लाइन बिछाने के लिए 50 करोड़ रुपये तथा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 13 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने क्षेत्र के ग्रामीण विकास कार्यों के लिए अलग से 5 करोड़ रुपये देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र के संतुलित एवं समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा जनहित से जुड़े विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।

रईया अनुसंधान केंद्र बनेगा बागवानी नवाचार और किसान समृद्धि का केंद्र : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि झज्जर के रईया में लगभग 100 एकड़ भूमि पर 13 करोड़ 27 लाख रुपये की लागत से स्थापित यह अत्याधुनिक बागवानी अनुसंधान केंद्र हरियाणा के कृषि एवं बागवानी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र केवल एक अनुसंधान संस्थान नहीं, बल्कि किसानों, वैज्ञानिकों और नई तकनीकों के बीच सेतु का कार्य करेगा। यहां स्थापित आधुनिक प्रयोगशालाओं में फल, सब्जी एवं पुष्प फसलों की उन्नत और जलवायु अनुकूल किस्मों के विकास के साथ-साथ जल संरक्षण, उत्पादन वृद्धि, गुणवत्ता सुधार तथा रोग एवं कीट प्रबंधन पर अनुसंधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस केंद्र में विकसित होने वाली तकनीकें किसानों की लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होंगी। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान और आधुनिक प्रौद्योगिकी का यह संगम आने वाले वर्षों में हरियाणा को बागवानी क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के साथ प्रदेश की बागवानी अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मुनीमपुर में बीज उत्पादन प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र का भी उद्घाटन किया गया है, जो नवाचार, अत्याधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से किसानों को बेहतर उत्पादन एवं विपणन के अवसर उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बागवानी अनुसंधान के मजबूत नेटवर्क के निर्माण की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में जींद के बधाना, अंबाला के चाणसौली, सोनीपत के मुरथल तथा करनाल के अंजनथली में बागवानी अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि चरखी दादरी के खरकड़ी में नए अनुसंधान केंद्र का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा, बागवानी क्षेत्र में हरियाणा हुआ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पिछले साढ़े 11 वर्षों में हरियाणा ने बागवानी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। ‘मेरा पानी मेरी विरासत’, भावांतर भरपाई योजना, सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं, किसान उत्पादक संगठनों तथा विभिन्न प्रोत्साहन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित किया गया है। उन्होंने बताया कि भावांतर भरपाई योजना के तहत अब तक 39 हजार 557 किसानों को 196 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। इसके अलावा सब्जी, मशरूम और संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 50 से 85 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में इजराइल तकनीक आधारित 14 उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनकी बदौलत किसान फल, सब्जी, पुष्प उत्पादन और मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाकर उनकी आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।

सतत बागवानी संवर्धन परियोजना से किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार और आधुनिक सुविधाओं का लाभ : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि फलों और सब्जियों की खेती में उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम करने तथा किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए राज्य सरकार ने 2 हजार 738 करोड़ रुपये की लागत से ‘सतत बागवानी संवर्धन परियोजना’ शुरू की है। उन्होंने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत प्रदेश में 400 बागवानी क्लस्टरों का विकास किया जाएगा तथा 500 उत्पादक समूहों को संगठित और सशक्त बनाया जाएगा। किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजारों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के अंतर्गत 1,000 वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण और 65 हजार एकड़ क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई के दायरे में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही संरक्षित खेती, एरोपोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स, ग्रीनहाउस और वर्टिकल फार्मिंग जैसी स्मार्ट बागवानी तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार भंडारण, मूल्य स्थिरता और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नई कोल्ड चेन नीति लागू करने की दिशा में भी कार्य कर रही है।

युवा कृषि को रोजगार नहीं, उद्यमिता का माध्यम बनाएं : नायब सिंह सैनी

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज कृषि केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आधुनिक एग्री-बिजनेस का स्वरूप ले चुकी है। ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विश्लेषण, स्मार्ट सेंसर, डिजिटल विपणन और ई-कॉमर्स जैसी तकनीकों ने कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। उन्होंने कहा कि गांवों में कृषि आधारित स्टार्टअप, प्रसंस्करण इकाइयों, खाद्य उद्योगों और एक्सपोर्ट ओरिएंटेड उद्यमों की अपार संभावनाएं हैं। युवा इन अवसरों का लाभ उठाकर स्वयं के साथ-साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार सृजित कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने युवाओं से कृषि और एग्री-बिजनेस को रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार उपलब्ध कराने वाले सशक्त माध्यम के रूप में अपनाने का आह्वान किया।

कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं, युवा बनें कृषि उद्यमी : श्याम सिंह राणा, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री

हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि कृषि केवल गेहूं और धान की पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह असीम संभावनाओं वाला विशाल क्षेत्र है। आज कृषि के भीतर फल, सब्जी, पुष्पोत्पादन, बीज उत्पादन, मत्स्य पालन, पशुपालन और कृषि प्रसंस्करण जैसे अनेक विशेषीकृत क्षेत्र विकसित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार चिकित्सा विज्ञान में प्रत्येक अंग के लिए अलग विशेषज्ञ होते हैं, उसी प्रकार कृषि के हर क्षेत्र में विशेषज्ञता और अनुसंधान की आवश्यकता है। भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां की उपजाऊ भूमि तथा अनुकूल परिस्थितियां कृषि को रोजगार और आर्थिक समृद्धि का सबसे बड़ा आधार बनाती हैं। यदि युवा आधुनिक तकनीकों और नवाचारों के साथ कृषि क्षेत्र में आगे आएं तो न केवल बेरोजगारी कम हो सकती है, बल्कि भारत वैश्विक खाद्य सुरक्षा में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कृषि मंत्री ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का किया आह्वान

कृषि मंत्री ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग को कम करने तथा प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खेतों में उपयोग होने वाले रसायनों का प्रभाव सीधे मानव स्वास्थ्य और पशुधन पर पड़ता है। विशेष रूप से पशुओं के चारे में रासायनिक खादों और कीटनाशकों के प्रयोग से बचना चाहिए, ताकि दूध और अन्य दुग्ध उत्पादों के माध्यम से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा कि देसी गाय आधारित प्राकृतिक खेती मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करती है। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण और जागरूकता प्रदान करना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि किसान प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाएंगे तो कृषि क्षेत्र की अनेक चुनौतियों का समाधान संभव होगा तथा किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के स्वरूप को बदलने की जरूरत : ओम प्रकाश धनखड़

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा तथा इजरायल के राजदूत रुवेन अजार का बादली विधानसभा क्षेत्र में आगमन पर स्वागत किया। अपने कृषि मंत्री के कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि विभिन्न देशों की यात्राओं के दौरान उन्हें कृषि क्षेत्र की अनेक उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों को निकट से देखने का अवसर मिला। उन्होंने चीन के ‘पेरी अर्बन कल्चर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां महानगरों के आसपास के क्षेत्रों में परंपरागत फसलों के स्थान पर बड़े पैमाने पर बागवानी उत्पादों की खेती की जाती है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। श्री धनखड़ ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि बादली क्षेत्र में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन एवं योजनाएं लागू की जाएं, ताकि किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अधिक लाभकारी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित हों। उन्होंने कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों का आभार व्यक्त करते हुए क्षेत्र की जनभावनाओं एवं विकास संबंधी मांगों पर आधारित मांग-पत्र भी मुख्यमंत्री को सौंपा।

भारत-इजरायल सहयोग से बागवानी क्षेत्र को मिलेगी नई दिशा : इजरायल के राजदूत रूवेन अजार

भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि और बागवानी क्षेत्र में भारत और इजरायल के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि इजरायल ने सीमित जल संसाधनों के बावजूद आधुनिक तकनीक, नवाचार और अनुसंधान के माध्यम से कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। हरियाणा में स्थापित उत्कृष्टता केंद्र और अनुसंधान संस्थान इसी साझेदारी के सफल उदाहरण हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रईया स्थित बागवानी अनुसंधान केंद्र तथा मुनीमपुर में स्थापित उत्कृष्टता केंद्र किसानों तक आधुनिक तकनीकों, उन्नत खेती पद्धतियों और नवीन अनुसंधान के लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल मिलकर कृषि क्षेत्र में नवाचार, जल संरक्षण, उत्पादकता वृद्धि और किसान समृद्धि के लिए भविष्य में भी सहयोग को और मजबूत करेंगे।

यह गणमान्य व्यक्ति और अधिकारी रहे मौजूद

इस अवसर पर बागवानी विश्वविद्यालय करनाल के वीसी डॉ सुरेश मल्होत्रा, बागवानी विभाग के महानिदेशक डॉ अर्जुन सैनी,पुलिस आयुक्त डॉ राजश्री सिंह, डीसी वर्षा खांगवाल सहित अन्य अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।  

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