नई दिल्लीः देश भर में E20 पेट्रोल को लेकर मामला गरमाया हुआ है। वहीं इसी के विरोध में दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल 100 लोगों के साथ पार्टी कार्यालय से पीएम हाउस तक मार्च के लिए निकले। पुलिस ने केजरीवाल के साथ अन्य 100 लोगों को काफिले को फिरोजशाह कोटला रोड पर रोक लिया गया। भारी पुलिस फोर्स सहित अन्य टीमें तैनात कर दी गई है। इसी के साथ बैरिकेडिंग की गई है। इस दौरान केजरीवाल अपने साथियों के साथ रोड पर ही धरने पर बैठ गए। मार्च में अरविंद केजरीवाल के साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सांसद संजय सिंह और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी भी शामिल रहीं। बताया जा रहा है कि केजरीवाल और ‘आप’ के नेता पंडित रवि शंकर शुक्ला लेन से चले थे कुछ दूरी पर ही फिरोजशाह रोड पर पुलिस ने रोक लिया।
अरविंद केजरीवाल के साथ मनीष सिसोदिया, संजय सिंह समेत कई अन्य आम आदमी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मौजूद हैं। सभी लोग ई-20 पेट्रोल के विरोध में नारेबाजी कर रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार दोपहर 12:00 बजे आम आदमी पार्टी के कार्यालय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास तक शांतिपूर्ण मार्च का नेतृत्व शुरू किया था। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि यह मार्च E20 पेट्रोल पॉलिसी को जबरदस्ती लागू करने के विरोध में किया जा रहा है। मार्च शुरू करने पहले केजरीवाल ने कहा था कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2 लाख से ज्यादा लोगों के पत्र सौंपेंगे।
पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर जनता पर जबरदस्ती थोपा जा रहा है। इससे पहले सोमवार को अरविंद केजरीवाल ने देश में E20 पॉलिसी लागू करने के विरोध में कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के बाहर एक राष्ट्रीय टाउन हॉल कार्यक्रम किया था। केजरीवाल ने इस मुद्दे पर केंद्र के सामने तीन मांगें रखीं थी। जिसमें पहली मांग पेट्रोल पंपों पर E20 और शुद्ध पेट्रोल, दोनों का विकल्प होना चाहिए, दूसरी मांग E20 शुद्ध पेट्रोल से सस्ता होना चाहिए और तीसरी मांग पेट्रोल की कीमत 84 रुपये प्रति लीटर से कम होनी चाहिए। इसके साथ ही पूर्व सीएम केजरीवाल ने दावा किया कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की वजह से गाड़ियां खराब हो रही हैं। उनका माइलेज भी कम हो रहा है।
उधर, ई-20 पेट्रोल पर सरकार की ओर से भी स्पष्टीकरण पहले ही आया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम को एक चरणबद्ध, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और विचार-विमर्श वाली प्रक्रिया के ज़रिए लागू किया गया है। इस प्रक्रिया में नीति आयोग, ऑटोमोबाइल निर्माता, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) और अन्य तकनीकी संस्थान शामिल रहे हैं।