चंडीगढ़: हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि दलहन फसलें न केवल देश की पोषण सुरक्षा की रीढ़ हैं, बल्कि ये मृदा स्वास्थ्य सुधार, नाइट्रोजन स्थिरीकरण तथा कृषि लागत में कमी लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बदलते जलवायु परिदृश्य में दलहन फसलें किसानों के लिए एक जलवायु-सहिष्णु एवं टिकाऊ विकल्प के रूप में उभर रही हैं। हरियाणा सरकार राज्य में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
मंत्री आज मध्यप्रदेश के सिहोर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा मध्य प्रदेश सरकार के कृषि विभाग द्वारा राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत आयोजित राष्रीराय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन में संबोधित कर रहे थे।
वर्ष 2022-23 में हरियाणा राज्य में खरीफ दालों का क्षेत्र 70000 एकड़ था, जो अब बढ़कर 100000 एकड़ तक हो गया है। अनुसंधान प्रसार के बिना कृषि विकास संभव नहीं है। दलहन उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मूल्य संवर्धन, विपणन, भंडारण एवं मूल्य स्थिरता पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित हो सके।
हरियाणा राज्य में 24 फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रही है। ’’राष्ट्रीय दलहन मिशन’’ के अंतर्गत राज्यों की सक्रिय भागीदारी से ही बेहतर परिणाम संभव हैं। इस दिशा में विशेष रूप से उत्पादकता बढ़ाने की रणनीति, बीज एवं तकनीक तक पहुंच, मूल्य शृंखला एवं बाजार, किसान कल्याण एवं जोखिम प्रबंधन, अनुसंधान-विस्तार-निजी क्षेत्र समन्वय तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से नवाचार को खेत तक पहुंचाना जरूरी है।
यह कार्यशाला ’’राज्यों और केंद्र के बीच समन्वित रोडमैप’’ तैयार करने में मील का पत्थर सिद्ध होगी। हरियाणा राज्य इस मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ’’पूर्ण सहयोग’’ देने के लिए प्रतिबद्ध है।
