आचार्य गणेश दत्त शास्त्री ने सुनाया ध्रुव चरित्र का प्रसंग
ऊना,सुशील पंडित: जिला ऊना के गांव बदोली स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीहरि की भक्ति में गोते लगाए। कथा व्यास आचार्य गणेश दत्त शास्त्री ने श्रीमद्भागवत के प्रसंगों को सरल एवं भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, सत्संग, संस्कार और अच्छे कर्मों का महत्व समझाया। कथा के दौरान पूरा मंदिर परिसर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंजता रहा।
श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन जोशी परिवार एवं समूह बदोली निवासी के सहयोग से किया जा रहा है। कथा में बदोली के अलावा आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु पहुंचकर कथा का श्रवण कर रहे हैं। तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा के साथ कथा का आनंद लिया और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की।
ध्रुव ने बाल अवस्था में ही दिखा दी अटूट भक्ति
कथा व्यास आचार्य गणेश दत्त शास्त्री ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि बालक ध्रुव ने छोटी सी उम्र में ही अपने दृढ़ संकल्प और अटूट भक्ति से भगवान नारायण को प्रसन्न कर लिया था। उन्होंने बताया कि सौतेली माता के कठोर वचनों से आहत होकर ध्रुव ने राजमहल छोड़ दिया और भगवान की प्राप्ति के लिए वन की ओर प्रस्थान किया।
आचार्य ने कहा कि ध्रुव के मन में भगवान को प्राप्त करने का संकल्प इतना मजबूत था कि कठिन परिस्थितियां भी उनके कदमों को डिगा नहीं सकीं। उन्होंने कठोर तपस्या की और अंततः भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि यदि मनुष्य के भीतर दृढ़ संकल्प, सच्ची श्रद्धा और भगवान के प्रति विश्वास हो तो कोई भी कठिनाई उसके मार्ग में बाधा नहीं बन सकती। आज के दौर में बच्चों को भी ध्रुव जैसे चरित्रों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
भक्ति के साथ संस्कार जरूरी
आचार्य गणेश दत्त शास्त्री ने कहा कि आज की पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक एवं नैतिक संस्कार देना भी जरूरी है। बच्चों को माता-पिता, बुजुर्गों और गुरुजनों का सम्मान करना सिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस परिवार में भगवान का नाम, सत्संग और संस्कार होते हैं, वहां सुख-शांति बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अहंकार, क्रोध, लोभ और मोह से दूर रहकर अपने जीवन को भगवान की भक्ति तथा सेवा कार्यों में लगाना चाहिए। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को केवल मोक्ष का मार्ग ही नहीं दिखाती, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा भी देती है।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु
कथा के दौरान आचार्य गणेश दत्त शास्त्री ने मधुर भजनों के माध्यम से भगवान की महिमा का गुणगान किया। भजनों की धुन पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए। पूरा कथा पंडाल राधे-राधे और जय श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। वातावरण ऐसा हो गया कि श्रद्धालु कुछ समय के लिए सांसारिक चिंताओं को भूलकर पूरी तरह भगवान की भक्ति में लीन हो गए।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की आरती में भाग लिया। इसके बाद प्रसाद वितरित किया गया। आयोजक जोशी परिवार एवं समूह बदोली निवासी ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए आगामी दिनों में भी कथा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आग्रह किया।
सात दिवसीय इस श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 6 से 12 सितंबर तक राधा-कृष्ण मंदिर बदोली में किया जा रहा है। कथा प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित हो रही है।