Sat, Jan 03, 2025, 20:57:41 PM
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Meta की प्राइवेसी पर उठाए यूजर्स ने सवाल, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

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नई दिल्ली: मेटा की नई प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर इस समय सोशल मीडिया पर काफी हलचल मची हुई है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप्प और थ्रेड्स का इस्तेमाल करने वालों को अब यह डर लग रहा है कि कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने वाली है। मेटा का यह कहना है कि इससे यूजर्स को उनकी पसंद की ऐड्स दिखाई जाएंगे लेकिन खई लोगों के अनुसार, प्राइवेसी के लिए यह खतरा बन सकती हैं।

एआई के भरोसे चलेगा बिजनेस

यह कोई छोटा बदलाव नहीं है। मेटा अपनी पूरी ऐड का बिजनेस अब एआई के सहारे चलाने वाली है। ऐसे में यह साफ है कि कंपनी अपने सभी प्लेटफॉर्म्स पर यूजर डेटा का इस्तेमाल पहले से ज्यादा गहराई के साथ करने वाली है। इससे विज्ञापन और भी स्टीक बनेंगे। नई पॉलिसी के अनुसार, मेटा का यह एआई ट्रैक करेगा कि आप क्या पसंद करते हैं क्या सर्च करते हैं और किस तरह की पोस्ट पर रुकते हैं। इसके अलावा आप एआई असिस्टेंट के साथ क्या बात करते हैं। इसमें सिर्फ मैसेज ही नहीं बल्कि उससे जुड़ा हुआ मेटा डेटा जैसे कि टॉपिक, कीवर्ड या फिर वॉयस चैट से जुड़ी जानकारी भी एल्गोरिदम तक पहुंच जाएगी।

यूजर्स को नहीं आएंगे बेकार के विज्ञापन

मेटा ने यह दावा किया है कि प्राइवेट मैसेज को इंसानों की तरह पढ़ता नहीं है लेकिन इन्हीं जानकारियों के आधार पर विज्ञापन को दिखाने की बात के कारण प्राइवेसी एक्सपर्ट्स को अलर्ट कर दिया है। अब मेटा एआई, सीधे तौर पर फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप का हिस्स बन गया है। यदि आप एआई से ट्रेकिंग, फिटनेस या ट्रैवल से जुड़ा कोई सवाल पूछेंगे तो कुछ ही समय के बाद आपको फीड में वैसे ही विज्ञापन दिखने लगेंगे। कंपनी ने यह भी कह दिया है कि इससे यूजर्स को बेकार और गैर जरुरी विज्ञापनों की जगह अपनी रुचि के ऐड नजर आएंगे।

ऐसे काम करेंगे मेटा के विज्ञापन

मेटा का यह कहना है कि उसने अक्टूबर 2025 में इन बदलावों के संकेत भी दिए थे और कंपनी को पूरा भरोसा भी है कि एआई आधारित विज्ञापन यूजर्स के लिए बेहतर साबित होंगे। कंपनी ने यह दावा किया है कि पर्सनल डेटा पूरी तरह सुरक्षित है। अब मेटा ऐप खोलते ही आपको जो कंटेंट और विज्ञापन दिखेंगे। इनमें एआई की भूमिका और ज्यादा होगी। भले ही फीड पहले से ज्यादा रिलेटेबल लगे परंतु यह सवाल बन रहा है कि आपका डेटा कैसे और कितनी हद तक इस्तेमाल होगा। पारदर्शिता और सहमति को लेकर भी इस समय चिंताएं उठ रही हैं जो फिलहाल अभी खत्म नहीं हो सकती।

 

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