नई दिल्लीः संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हो गई है। कार्यवाही शुरू होते ही सबसे पहले दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि दी गई। जिसके बाद संसद के शीतकालीन सत्र की हंगामेदार शुरुआत हुई है। एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष हंगामा कर रहा है। इस सत्र में सरकार का फोकस 14 अहम विधेयकों को पास कराने पर है, जिनमें दिवाला कानून, बीमा कानून, सिक्योरिटीज मार्केट, कॉर्पोरेट कानून, राष्ट्रीय राजमार्ग, उच्च शिक्षा आयोग, एटॉमिक एनर्जी, जीएसटी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बिल शामिल हैं। शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा। 19 दिनों में संसद की 15 बैठकें होनी हैं। यह 18वीं लोकसभा का छठा सत्र है। इस दौरान कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा, ‘शीतकालीन सत्र में सबसे बड़ा वोट का मुद्दा है, जिस तरीके से वोटों की हेरा फेरी करके सरकार बनाई जाती है, उसपर लगातार चर्चा जारी रहेगी। उसपर चुनाव आयोग जवाबदेह नहीं है, जवाब उन्हें (सरकार) देना हैं लेकिन वो जवाब हमसे मांग रहे हैं, यह दुख की बात है।’
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वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में 2 अहम बिल पेश किया। दोनों बिल उन उत्पादों पर नई कर व्यवस्था से जुड़े हैं, जिन पर अभी जीएसटी क्षतिपूर्ति सेस लगता है- जैसे सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला। इसके जरिए केंद्रीय उत्पाद शुल्क एक्ट, 1944 में संशोधन कर सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर क्षतिपूर्ति सेस खत्म होने के बाद एक्साइज ड्यूटी के जरिए राजस्व संग्रह जारी रखा जाएगा। इसे केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 नाम दिया गया है। वित्त मंत्री ने स्वास्थ्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा सेस विधेयक, 2025 भी पेश किया। नया सेस उन उत्पादों पर लगेगा जिनसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा जोखिम माना जाता है। पान मसाला जैसे उत्पादों पर यह सेस लगाया जाएगा।
तंबाकू और पान मसाला जैसी हानिकारक उत्पादों पर अभी 28% जीएसटी लगता है। क्षतिपूर्ति सेस खत्म होने के बाद, तंबाकू और संबंधित उत्पादों की बिक्री पर 40% GST और उत्पाद शुल्क लगेगा, जबकि पान मसाला पर 40% GST और स्वास्थ्य सुरक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सेस भी लगेगा। केंद्रीय उत्पाद शुल्क संशोधन बिल में सिगार/चुरूट/सिगरेट पर 5,000 रुपए से लेकर 1,000 स्टिक पर 11,000 रुपए तक उत्पाद शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, इसमें कच्चा तंबाकू पर 60-70% और निकोटीन और सूंघने वाले उत्पादों पर 100% टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। अभी सिगरेट पर कीमत के अनुसार 5% क्षतिपूर्ति सेस और 1,000 स्टिक पर 2,076-3,668 रुपए का सेस लगता है।
बता दें कि सरकार के इस विधेयक का उद्देश्य “जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर समाप्त होने के बाद, टैक्स को संरक्षित करने के लिए सरकार को तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क की दर बढ़ाने के लिए राजकोषीय गुंजाइश प्रदान करना है।” स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025, पान मसाला जैसी विशिष्ट वस्तुओं के उत्पादन पर उपकर लगाने का प्रावधान करता है। तंबाकू और पान मसाला जैसी हानिकारक वस्तुओं पर वर्तमान में 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है, साथ ही विभिन्न दरों पर क्षतिपूर्ति उपकर भी लगता है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क संशोधन विधेयक, 2025 और स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025 यह सुनिश्चित करेंगे कि क्षतिपूर्ति उपकर समाप्त होने के बाद भी तंबाकू और पान मसाला जैसी हानिकारक वस्तुओं पर कर की दर समान बनी रहे। हालांकि, सिगरेट समेत अन्य तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ेगा इस पर फिलहाल कोई स्पष्टता नहीं है।