चंडीगढ़: हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने वित्तीय संस्थानों से आग्रह करते हुए कहा कि वे ऋण की प्रक्रियाओं को आसान बनाकर, गारंटी (कोलेटरल) की ज़रूरतों को कम करके और हर स्वयं-सहायता समूह व सूक्ष्म-उद्यम को राष्ट्र-निर्माण में भागीदार मानकर ग्रामीण महिला उद्यमियों तक अपनी पहुंच मज़बूत करें।
राज्यपाल आज चंडीगढ़ में कॉन्फेडरेशन ऑफ वुमन एंटरप्रेन्योर्स (COWE) इंडिया द्वारा “ग्रामीण जड़ों से जुड़ाव, टेक्नोलॉजी से सशक्तिकरण: महिलाओं के नेतृत्व वाले MSME के लिए टिकाऊ भविष्य का निर्माण” विषय पर आयोजित ‘विमेंस इंटरनेशनल समिट ऑन एंटरप्रेन्योरशिप (WISE) 2026’ के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर हरियाणा की प्रथम महिला श्रीमती मित्रा घोष भी विशेष रूप से उपस्थित रही।
वित्तीय संसाधनों तक पहुँच के साथ-साथ बाजार तक पहुँच को भी समान रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि जो महिलाएँ अपनी मेहनत और कौशल से बुनाई, खेती, हस्तशिल्प अथवा अन्य उत्पाद तैयार करती हैं, उन्हें डिजिटल और भौतिक दोनों प्रकार के बाजारों तक बेहतर पहुँच मिलनी चाहिए। इससे उनके उत्पादों को उचित मूल्य मिल सकेगा और वे अपने गांवों तथा छोटे कस्बों की सीमाओं से आगे बढ़कर व्यापक ग्राहक वर्ग तक पहुँच बनाने में सक्षम होंगी।
असीम कुमार घोष ने महिला उद्यमियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, वित्तीय संस्थानों और अन्य हितधारकों के बीच संवाद, नेटवर्किंग तथा अनुभव एवं जानकारी साझा करने के लिए मंच उपलब्ध कराने हेतु COWE इंडिया की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि WISE 2026 के दौरान हुई चर्चाओं और विचार-विमर्श से महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित उद्यमों, के लिए नए और सार्थक अवसरों का मार्ग प्रशस्त होगा।