ऊना,सुशील पंडित: हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। यहां से निकलने वाला पत्थर और अन्य खनिज देश के विकास में योगदान देते हैं, लेकिन दूसरी ओर हिमाचल के लोगों को ही निर्माण सामग्री महंगे दामों पर खरीदनी पड़ रही है। यह स्थिति गंभीरता से विचार करने योग्य है।
सीमेंट के दाम में 10 रुपये प्रति बैग की बढ़ोतरी से आम परिवार, छोटे निर्माणकर्ताओं और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ता है। 100 बैग पर करीब 1,000 रुपये और 500 बैग पर करीब 5,000 रुपये का अतिरिक्त खर्च हो सकता है। बड़े निर्माण कार्यों में यह बोझ और बढ़ जाता है।
पहले ही महंगाई के कारण आम आदमी के लिए अपना घर बनाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में सीमेंट की कीमतों में बार-बार बढ़ोतरी निर्माण लागत को और बढ़ा रही है। हिमाचल सरकार को सीमेंट कंपनियों द्वारा की जा रही मूल्य वृद्धि की समीक्षा करवानी चाहिए। कंपनियों से कीमत बढ़ाने के आधार और लागत संरचना का स्पष्टीकरण लिया जाए तथा यदि कहीं अनुचित मूल्य निर्धारण या प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधि की आशंका हो तो संबंधित सक्षम प्राधिकरण के समक्ष मामला उठाया जाए।
सरकार को अपने अधिकार क्षेत्र में कर एवं अन्य नीतिगत पहलुओं की समीक्षा करते हुए उपभोक्ताओं के हित में उचित और पारदर्शी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। जब प्राकृतिक संसाधन हमारे प्रदेश से मिल रहे हैं, तो हिमाचल के लोगों को निर्माण सामग्री के लिए लगातार अधिक कीमत क्यों चुकानी पड़े-इस पर सरकार और संबंधित कंपनियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए। विकास का लाभ आम जनता तक पहुंचे, न कि बढ़ती निर्माण लागत का बोझ भी जनता पर ही पड़ता रहे।