शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में निरन्तर बदल रही स्थितियों को ध्यान में रखते हुए केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। आज ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है, जो युवाओं को ज्ञान के साथ-साथ कौशल, आत्मविश्वास, रोजगार क्षमता तथा उद्यमिता के अवसर भी प्रदान करे।
राज्यपाल ने आज कांगड़ा जिला के पालमपुर में श्री साई विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान उसके ज्ञान, मूल्यों, अनुसंधान, नवाचार और समाज के प्रति योगदान से निर्धारित होती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 में बधानी से शुरू हुई श्री साईं ग्रुप की शैक्षणिक यात्रा शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और निरंतर प्रयासों का प्रेरणादायक उदाहरण है।

गुप्ता ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रभाव केवल एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों तक इसका लाभ पहुंचता है। उन्होंने कहा कि दूरदर्शी नेतृत्व वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि अगले 20, 30 और 50 वर्षों की संभावनाओं और चुनौतियों को ध्यान में रखकर कार्य योजनाएं तैयार करता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिक्षा को अधिक समग्र, लचीला, बहुविषयक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि समानता, गुणवत्ता और जवाबदेही इस नीति के महत्वपूर्ण आधार हैं और उच्च शिक्षा में अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास, बहुविषयक शिक्षा को भी प्रोत्साहित किया गया है।

विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी पूंजी हैं और उन्हें उपलब्ध अवसरों का भरपूर लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने शिक्षकों का सम्मान करने, निरंतर सीखने के प्रति प्रतिबद्ध रहने तथा तकनीक के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहने का आह्वान किया।