भारतीय अधिकारियों के प्रयासों से छुड़ाया गया, पैतृक गांव पहुंचने पर राकेश ने बयां की दर्द भरी दास्तां
जालंधर: फिल्लौर इलाके के गांव भैणी का रहने वाला राकेश बेहतर भविष्य की उम्मीद में विदेश जाने के लिए 4 अगस्त को घर से निकला था। उसका लक्ष्य इटली पहुंचकर काम करना और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करना था। लेकिन इटली पहुंचने से पहले ही उसे बेहद मुश्किल और डरावने हालात का सामना करना पड़ा। राकेश के मुताबिक, वह भारत से पहले दुबई पहुंचा और वहां से उसे केन्या भेज दिया गया। केन्या पहुंचने के कुछ समय बाद ही कुछ लोगों ने उसका अपहरण कर लिया और उसे कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा।
अपहरण के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और फोटो
राकेश के परिवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब सोशल मीडिया पर राकेश के वीडियो और फोटो सामने आने लगे। इन वीडियो में उसके साथ डराने-धमकाने वाला व्यवहार किए जाने की बात सामने आई। परिवार को समझ नहीं आ रहा था कि राकेश कहां है और किस हालत में है। उसकी सुरक्षित वापसी को लेकर परिवार लगातार परेशान रहा।
अपहरणकर्ताओं ने परिवार से मांगे 70 हजार डॉलर
राकेश ने भारत लौटने के बाद अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि केन्या पहुंचने के कुछ ही समय बाद कुछ लोगों के एक समूह ने उसे अगवा कर लिया। उसने बताया कि उसे एक ऐसी जगह रखा गया था, जहां हालात बेहद डरावने थे। अपहरणकर्ता उसके मुंह में कपड़ा ठूंस देते थे और उसके शरीर पर पेंट लगाकर वीडियो बनाते थे। उसे इन वीडियो में अपनी बात कहने के लिए मजबूर किया जाता था। राकेश के अनुसार, अपहरणकर्ता उससे कहते थे कि वह उनका साथ दे, क्योंकि वे उसके ट्रैवल एजेंट से पैसे वसूलना चाहते हैं। इस दौरान उसे लगातार डराया और धमकाया गया। अपहरणकर्ताओं ने उसके परिवार से उसकी रिहाई के बदले 70,000 अमेरिकी डॉलर की मांग भी की।
परिवार ने मदद के लिए सामाजिक कार्यकर्ता से संपर्क किया
राकेश के परिवार को जब पूरी घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने उसकी सुरक्षित वापसी के लिए मदद मांगनी शुरू की। परिवार ने सोशल एक्टिविस्ट कुलविंदर सिंह फ्रांस से संपर्क किया। कुलविंदर सिंह इंडियन माइनॉरिटी फेडरेशन यूरोप के कन्वीनर हैं। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारत सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने इस मामले को राज्यसभा सदस्य सतनाम सिंह संधू के सामने भी रखा और उन्हें पत्र लिखकर राकेश को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए मदद की मांग की।
भारतीय अधिकारियों ने केन्या में शुरू की कार्रवाई
मामला भारत सरकार के ध्यान में आने के बाद भारतीय अधिकारियों ने इस संबंध में कदम उठाए। भारतीय दूतावास ने केन्याई अधिकारियों से संपर्क किया और राकेश की जानकारी साझा करते हुए उसकी सुरक्षित रिहाई के लिए मदद मांगी। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राकेश को अपहरणकर्ताओं के कब्जे से छुड़ा लिया। कई दिनों तक डर और तनाव में रहने के बाद राकेश आखिरकार सुरक्षित बाहर आया और बाद में अपने गांव लौट गया।
घर लौटने के बाद राकेश ने बताया अपना दर्द
भारत लौटने के बाद राकेश ने अपनी पूरी कहानी बताई। उसने कहा कि जिस समय वह बंधक था, उस दौरान उसे लगातार अपनी जान का डर लगा रहता था। राकेश ने कहा कि परिवार से इतनी बड़ी रकम मांगने के बाद उनके लिए हालात और भी मुश्किल हो गए थे। उसे यह भी डर था कि अगर समय पर मदद नहीं मिली तो उसके साथ कुछ भी हो सकता है। घर वापस पहुंचने के बाद उसने भारत सरकार, भारतीय अधिकारियों और उन सभी लोगों का आभार जताया, जिन्होंने उसकी रिहाई में मदद की।
राकेश ने कहा कि अगर समय पर मदद नहीं मिली होती तो शायद वह आज अपने परिवार के बीच नहीं होता। जानकारी के अनुसार, राकेश ने अपने ससुराल पक्ष के एक रिश्तेदार के माध्यम से ट्रैवल एजेंट से संपर्क किया था। राकेश को इटली भेजने के लिए 2 लाख रुपये पहले देने और बाकी रकम इटली पहुंचने के बाद देने की बात तय हुई थी। लेकिन इटली जाने के बजाय उसे दुबई और फिर केन्या भेज दिया गया। इसके बाद वहां उसके अपहरण की घटना सामने आई।
ट्रैवल एजेंट के खिलाफ कार्रवाई की मांग
मामला सामने आने के बाद ट्रैवल एजेंट के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। राकेश के परिवार ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच की जाए और अगर ट्रैवल एजेंट की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
परिवार का कहना है कि राकेश विदेश में बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर घर से निकला था, लेकिन उसे बेहद गंभीर परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। फिलहाल राकेश अपने परिवार के पास सुरक्षित लौट आया है। अब परिवार इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच का इंतजार कर रहा है।