शिमला: हिमाचल प्रदेश में सेब केवल एक फल नहीं, बल्कि पहाड़ की अर्थव्यवस्था की धुरी है। राज्य के हजारों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी है और इसके इर्द-गिर्द परिवहन, पैकेजिंग, भंडारण, प्रसंस्करण तथा विपणन जैसी अनेक गतिविधियां संचालित होती हैं। हिमाचल में बागवानी को मजबूत करना केवल उत्पादन बढ़ाने का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
इस वर्ष अभी तक एचपीएमसी ने एमआईएस-2026 के अंतर्गत बागवानों से 4,188.504 मीट्रिक टन सेब खरीदा है। यह खरीद निर्धारित 12 रुपये प्रति किलोग्राम के बाजार हस्तक्षेप मूल्य पर केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जा रही है। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में बागवानी उत्पादन अनेक भौगोलिक और मौसमी चुनौतियों से जुड़ा है। ऐसी स्थिति में खरीद प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ना रिकॉर्ड प्रबंधन और संस्थागत खरीद व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाने में सहायक हो सकता है।
राज्य सरकार सेब के कचरे के वैज्ञानिक उपयोग और मूल्य संवर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने पर भी बल दे रही है। इसका उद्देश्य बागवानी उत्पादों की बर्बादी कम करने के साथ-साथ प्रसंस्करण गतिविधियों को बढ़ावा देना, रोजगार के अवसर पैदा करना और बागवानी अर्थव्यवस्था में नए आयाम जोड़ना है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा तकनीक, संस्थागत समर्थन, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन और मूल्य संवर्धन पर दिया जा रहा बल हिमाचल की बागवानी को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढालने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। बागीचे से बाजार तक की पक्रिया जितनी अधिक संगठित, पारदर्शी और मूल्य-सृजन पर आधारित होगी, उतनी ही अधिक संभावनाएं हिमाचल की बागवानी अर्थव्यवस्था के विस्तार की बनेंगी।