ऊना: जिला ऊना के गांव बदोली स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में जोशी परिवार एवं समूह बदोली निवासियों के सहयोग से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास आचार्य गणेश दत्त शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म सहित विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग आते ही कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठा और श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ भगवान का स्वागत किया।इस अवसर पर मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया था। आचार्य गणेश दत्त शास्त्री ने कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है और धर्म की हानि होती है, तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का अवतार भी अत्याचार और अधर्म के अंत तथा धर्म की पुनर्स्थापना के लिए हुआ।
कथा व्यास ने देवकी-वसुदेव विवाह, कंस का अत्याचार, आकाशवाणी, देवकी के छह पुत्रों का वध और भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान का जन्म आधी रात को कारागार में हुआ। भगवान के प्राकट्य के बाद वसुदेव उन्हें टोकरी में रखकर यमुना पार करते हुए गोकुल पहुंचे, जहां उन्होंने नंद बाबा के घर श्रीकृष्ण को पहुंचाया। श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग आते ही कथा स्थल पर ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे गूंजने लगे। श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा की और भजनों पर जमकर झूमे। मंदिर परिसर में बाल कृष्ण की आकर्षक झांकी भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही।
आचार्य ने इसके साथ ही नंदोत्सव, पूतना वध और भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भी वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को जीवन में अपनाने तथा धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर श्रीमद्भागवत पुराण का श्रवण किया। मंदिर परिसर में पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा। आयोजक जोशी परिवार एवं समूह बदोली निवासियों ने श्रद्धालुओं से आगामी कथा में भी अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आग्रह किया।