चंडीगढ़: हरियाणा को ड्रोन इनोवेशन, स्वदेशी तकनीक विकास, उन्नत विनिर्माण और युवाओं के नेतृत्व वाले उद्यमिता के केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, हरियाणा सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग,स्टार्टअप हरियाणा तथा ड्रोन टेक मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड ने “ड्रोनोथॉन – हरियाणा ड्रोन इनोवेशन चैलेंज”की शुरुआत की। इस दिशा में वीरवार को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ अमित कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय ड्रोन उद्योग परामर्श बैठक का आयोजन किया गया।
स्टार्टअप हरियाणा के इनक्यूबेटर्स के माध्यम से विश्वविद्यालयों तक पहुंचेगा ड्रोनोथॉन
ड्रोनोथॉन की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका राज्यव्यापी यूनिवर्सिटी आउटरीच मॉडल होगा। इस कार्यक्रम को स्टार्टअप हरियाणा से संबद्ध इनक्यूबेटरों के माध्यम से विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों तक पहुंचाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य एक विकेंद्रीकृत इनोवेशन नेटवर्क तैयार करना है, जिसके माध्यम से हरियाणा के विभिन्न हिस्सों के विश्वविद्यालय ड्रोनोथॉन में भाग ले सकें और वास्तविक औद्योगिक चुनौतियों तक अपनी पहुंच बना सकें।
ड्रोनोथॉन: औद्योगिक समस्याएं बनेंगी विश्वविद्यालयों की इनोवेशन चुनौतियां
ड्रोनोथॉन का मुख्य उद्देश्य उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं को हरियाणा के विश्वविद्यालयों की प्रतिभा और इनोवेशन क्षमता से सीधे जोड़ना है। इस पहल के तहत उद्योगों को वास्तविक समस्याओं और तकनीकी चुनौतियों से संबंधित समस्या विवरण प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
हरियाणा को ड्रोन इनोवेशन एवं मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में कदम
ड्रोनोथॉन को केवल एक प्रतियोगिता के रूप में नहीं, बल्कि हरियाणा के लिए एक सतत नवाचार से उद्यमिता तक की श्रृंखला के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। प्रमुख ड्रोन कंपनियों को विश्वविद्यालयों, इनक्यूबेटरों, शोधकर्ताओं और युवा नवाचारकर्ताओं के साथ जोड़कर ड्रोनोथॉन का उद्देश्य हरियाणा को ड्रोन नवाचार, विनिर्माण, अनुसंधान, कौशल विकास और उद्यमिता के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में योगदान देना है।
हरियाणा के विश्वविद्यालयों को किया जाएगा आमंत्रित
ड्रोनोथॉन को एक राज्यव्यापी यूनिवर्सिटी इनोवेशन प्रोग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा और हरियाणा के विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों को इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों, फैकल्टी, शोधकर्ताओं और इनोवेटर्स की मल्टीडिसिप्लीनरी टीम्स बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को केवल अकादमिक या सैद्धांतिक प्रोजेक्ट तक सीमित रहने के बजाय वास्तविक औद्योगिक एवं सरकारी उपयोग से जुड़ी समस्याओं का समाधान विकसित करने का अवसर मिलेगा।
युवाओं को सीधे मेंटर करेगा उद्योग
ड्रोनोथॉन की एक महत्वपूर्ण विशेषता इनोवेशन की पूरी प्रक्रिया में उद्योग की प्रत्यक्ष भागीदारी होगी। भाग लेने वाली ड्रोन निर्माता और टेक्नोलॉजी कंपनियां केवल प्रोबल्म स्टेटमेंटस ही नहीं देंगी, बल्कि विश्वविद्यालयों की टीमों को टेक्निकल मेंटरशिप, डोमेन एक्सपर्टीज़ और प्रैक्टिकल इंडस्ट्री इनपुट्स देने में भी सहयोग करेंगी।
ड्रोनोथॉन के प्रमुख चुनौती क्षेत्र
ड्रोनोथॉन के तहत औद्योगिक समस्या विवरण में ड्रोन के उभरते हुए अनुप्रयोगों से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है, जैसे- कृषि छिड़काव और प्रिसिजन एग्रीकल्चर, ड्रोन आधारित मैपिंग और सर्वेक्षण, सड़क, राजमार्ग और पुलों का निरीक्षण, बुनियादी ढांचे की निगरानी, लॉजिस्टिक्स और लास्ट-माइल डिलीवरी, औद्योगिक निरीक्षण, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया, सार्वजनिक सुरक्षा और निगरानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वायत्त ड्रोन संचालन, स्वदेशी ड्रोन कंपोनेंट्स, बैटरी और प्रोपल्शन तकनीक, ड्रोन संचार प्रणाली, जीआईएस और जियोस्पेशियल तकनीक, ड्रोन डेटा एनालिटिक्स, रक्षा और रणनीतिक अनुप्रयोग, काउंटर-ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक, स्वास्थ्य सेवाएं और आपातकालीन लॉजिस्टिक्स, स्मार्ट सिटी अनुप्रयोग, खनन और प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी, उन्नत विनिर्माण और उभरती ड्रोन तकनीक शामिल हैं।