पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और हमीरपुर के सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने हिमाचल के राज्यपाल कविंदर गुप्ता के साथ आईआईआईटी (IIIT) ऊना के 8वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया
ऊना,सुशील पंडित: पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और हमीरपुर से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने आज हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल कविंदर गुप्ता और संस्थान के निदेशक मनीष गौड़ के साथ भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) ऊना के 8वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया। स्नातक करने वाले छात्रों को बधाई देते हुए, अनुराग सिंह ठाकुर ने उन्हें न केवल भारत का भविष्य बल्कि इसके भाग्य का निर्माता बताया बल्कि उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे वो विकसित भारत 2047 के मेगा मिशन को आगे बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण “इंजन और स्पार्क प्लग” के रूप में काम कर सकते हैं।
उन्होंने पिछले एक दशक में भारत के प्रमुख उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के उल्लेखनीय विस्तार की सराहना की और देश के नवाचार परिदृश्य में हुई तीव्र वृद्धि का उल्लेख किया, जो 2014 में 500 से कम स्टार्टअप और 4 यूनिकॉर्न से बढ़कर आज 2.23 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप और 131 यूनिकॉर्न तक पहुंच गया है।
अनुराग ठाकुर ने संस्थान से निकलने वाले छात्रों से आग्रह किया कि वे अपनी पेशेवर यात्रा में जहां भी जाएं, “राष्ट्र प्रथम” (Nation First) की मानसिकता को आत्मसात करें। इस बात पर जोर देते हुए कि दीक्षांत समारोह शिक्षा के अंत के बजाय एक नए पड़ाव का प्रतीक है, उन्होंने समाज को वापस लौटाने (pay back) की नैतिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने युवा इंजीनियरों और नेताओं से अपने 11 मौलिक कर्तव्यों के साथ मौलिक अधिकारों को संतुलित करके संविधान को बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को एक आत्मनिर्भर वैश्विक महाशक्ति और एआई तथा प्रौद्योगिकी में अग्रणी स्थापित करने के लिए सक्रिय नागरिक योगदान, लोकतांत्रिक संवाद और राष्ट्रीय प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने युवाओं से खेलों को अपनाकर और नशे की लत के खतरे से दृढ़ता से दूर रहकर एक स्वस्थ व अनुशासित जीवन शैली बनाए रखने का भी आह्वान किया, और “खेलोगे तो खिलोगे” तथा “स्टे फिट, स्टे हिट” (Stay Fit, Stay Hit) के दर्शन को रेखांकित किया। सोशल मीडिया पर वायरल होने के कुचक्र में फंसने के प्रति चेतावनी देते हुए, उन्होंने छात्रों को “रील यूथ नहीं, बल्कि रियल यूथ” (Real Youth, not Reel Youth) बनने की आकांक्षा रखने की सलाह दी और उन्हें याद दिलाया कि वास्तविक मूल्य चरित्र, ठोस उपलब्धियों और समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने की क्षमता में निहित है। अंत में, उन्होंने स्नातकों को राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय रूप से शामिल होने, विविध दृष्टिकोणों का सम्मान करने और भारत की विकास यात्रा का नेतृत्व करने वाले जिम्मेदार नेताओं के रूप में आगे आने के लिए प्रोत्साहित करते हुए अपनी बात समाप्त की।