जालंधर, ENS: पंजाब में करोड़ों रुपये के चर्चित रियल एस्टेट और भूमि उपयोग परिवर्तन धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) टीम एक्शन मोड में आ गई है। हाल ही में पंजाब कैडर के आईएएस अधिकारी कंवलप्रीत बराड़ ईडी दफ्तर में 10 दिनों में दूसरी बार पेश हुई थी। जहां आईएएस कंवलप्रीत से ईडी टीम ने 7 घंटे तक पूछताछ की थी। इसी कड़ी में पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव और मौजूदा अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) अनुराग वर्मा आज जालंधर स्थित ईडी के जोनल कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया गया।
लेकिन ईडी दफ्तर में अनुराग की पेशी को लेकर कहा जा रहा हैकि वह आज किसी कारणों के चलते पेश नहीं होंगे। बता दें कि 1993 बैच के आईएएस अधिकारी अनुराग वर्मा इस मामले में केंद्रीय एजेंसी द्वारा तलब किए जाने वाले दूसरे बड़े अधिकारी हैं। ईडी द्वारा मोहाली के ‘सनटेक सिटी’ और ‘अल्टस स्पेस बिल्डर्स’ जैसे प्रमुख रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में हुई कथित धांधलियों और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की जा रही है। जांच के अनुसार, बिल्डरों द्वारा किसानों के कथित जाली हस्ताक्षर और अंगूठे लगाकर सहमति पत्र तैयार किए गए और उनके आधार पर ही सीएलयू मंजूरियां हासिल की गईं।
ईडी ने अदालत में दायर अपनी शिकायत में कथित तौर पर 348 करोड़ रुपये की ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ का अनुमान लगाया है। एजेंसी का आरोप है कि प्रोजेक्टों के मूल लेआउट प्लान और नियमों का उल्लंघन कर निजी बिल्डरों को गैर-कानूनी फायदा पहुंचाया गया। जिस समय ये कथित अनियमितताएं हुईं, उस समय अनुराग वर्मा हाउसिंग और अर्बन डेवलपमेंट विभाग के प्रमुख के तौर पर तैनात थे। ईडी यह पता लगाना चाहती है कि विभागीय स्तर पर सीएलयू मंजूरियों, लेआउट में बदलावों और अर्जियों की पड़ताल के दौरान नियमों का पालन किया गया था या नहीं। समन प्राप्त होने पर अनुराग वर्मा ने स्पष्ट किया था कि वे ईडी के सामने पेश होकर सभी आवश्यक रिकॉर्ड और तथ्य पूरी पारदर्शिता से रखेंगे।