चंडीगढ़/साहिबजादा अजीत सिंह नगर: पंजाब के पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामले, बिजली, ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री स. तरुनप्रीत सिंह सौंद ने आज युवा पीढ़ी से श्री गुरु रविदास जी की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि गुरु साहिब ने आज से करीब छह सदियों पहले उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की थी।
श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित पंजाब सरकार द्वारा आयोजित वर्ष भर चलने वाले समारोहों की श्रृंखला के तहत सीजीसी यूनिवर्सिटी, झंजेड़ी, मोहाली में आयोजित 8वें राज्य स्तरीय सेमिनार को संबोधित करते हुए स. तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि श्री गुरु रविदास जी ने मानवता के आध्यात्मिक और सामाजिक उत्थान में महान योगदान दिया तथा श्रम की गरिमा और कड़ी मेहनत के सिद्धांत को विशेष महत्व दिया।

उन्होंने कहा कि श्री गुरु रविदास जी ने उस दौर में दबे-कुचले और कमजोर वर्गों के पक्ष में निर्भीकता से आवाज़ उठाई, जब लोगों के साथ जाति और अन्य सामाजिक विभाजनों के आधार पर भेदभाव और अन्याय किया जाता था। गुरु साहिब ने समानता, न्याय और मानवीय गरिमा के सार्वभौमिक सिद्धांतों का प्रचार किया तथा भेदभाव से मुक्त समाज की परिकल्पना की।
सौंद ने आगे जानकारी दी कि जालंधर के डेरा बल्लां के निकट 25 करोड़ रुपये की लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तर्ज पर श्री गुरु रविदास जी बाणी अध्ययन केंद्र का निर्माण किया जा रहा है, जबकि इस परियोजना के लिए भूमि खरीद पर 11 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने 650वें प्रकाश पर्व के वर्ष भर चलने वाले समारोहों के लिए प्रारंभिक तौर पर 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।
उन्होंने कहा कि गुरु साहिब ने कमजोर वर्गों के उत्पीड़न का विरोध किया और पूरी मानवता में समानता का उपदेश दिया। श्री गुरु रविदास जी द्वारा प्रतिपादित बेगमपुरा की अवधारणा ऐसे समानतापूर्ण समाज का आदर्श प्रस्तुत करती है, जहां सभी लोग जाति और रंग के भेदभाव से मुक्त होकर सम्मान और गरिमा के साथ जीवन व्यतीत कर सकें।