शिमला: हिमाचल प्रदेश के तीन पारंपरिक उत्पादों रणसिंघा, लकड़ी की नक्काशी और हस्तनिर्मित कालीनों को हाल ही में भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्राप्त हुआ है। इन उत्पादों से जुड़े कारीगरों ने आज लोक भवन में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से भेंट की।
जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा स्थानीय उत्पादक समूहों, कारीगर समूहों तथा अन्य संबंधित हितधारकों के सहयोग से पूर्ण करवाई गई। इस अवसर पर राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने नाबार्ड के अधिकारियों के माध्यम से अचारी (एएसीएचआरआई) फाउंडेशन कुल्लू के मनीष भारती एवं महेश भारती, कालीन कारीगर शकुंतला देवी, एसएवीएम संस्था मंडी के हीरा मणि, रणसिंघा कारीगर प्रदीप कुमार तथा लकड़ी की नक्काशी के कारीगर कृष्ण लाल को जीआई प्रमाण-पत्र प्रदान किए।
पारंपरिक हस्तशिल्प हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने इन पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ कारीगरों के कौशल को आर्थिक रूप से सशक्त और लाभकारी बनाने के लिए और अधिक प्रयास करने का आह्वान किया।