अमृतसरः भारत-पाकिस्तान के दरमियान शांति, आपसी भाईचारे और संवाद को बढ़ावा देने की अपील करते हुए हिंद-पाक दोस्ती मंच से जुड़े पदाधिकारियों ने कहा कि दोनों देशों की आम जनता जंग नहीं, बल्कि अमन, तरक्की और खुशहाली चाहती है। उन्होंने कहा कि आम इंसान अपने जीवन को बेहतर बनाना, अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना और नौजवानों के लिए रोज़गार के बेहतर अवसर पैदा करना चाहता है। ऐसी परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच लगातार तनाव और टकराव किसी भी पक्ष के हित में नहीं है। प्रवक्ता ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य शांति और अमन के संदेश को आगे बढ़ाना है। अगर समाज लगातार लड़ाई और नफ़रत के माहौल में रहेगा तो इसका सबसे ज़्यादा नुकसान आम लोगों को ही झेलना पड़ेगा। लोगों से अपील की गई कि वे लड़ाई-झगड़े से दूर रहें और शिक्षा, संगीत, फ़िल्मों और अन्य सकारात्मक गतिविधियों के ज़रिए समाज को आगे लेकर जाएं।
उन्होंने कहा कि अगर कुछ लोगों द्वारा कोई गलती या गलत काम किया गया है और सरकार द्वारा उस पर कार्रवाई की गई है तो संबंधित लोगों की पहचान करके कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। पर कुछ लोगों की गलतियों की सज़ा पूरे समाज या 99 फीसदी आम जनता को नहीं दी जा सकती। समस्या पैदा करने वाले व्यक्तियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए, न कि आम नागरिकों में दुश्मनी और नफ़रत पैदा की जाए।
प्रवक्ता ने दोनों देशों की सरकारों से अपील की कि 1947 के विभाजन के कारण बिछड़े परिवारों को मिलाने के लिए सीमाओं को खोलने की दिशा में कदम उठाए जाएं। व्यापारियों के लिए व्यापार के रास्ते खोले जाएं ताकि दोनों देशों के लोग आर्थिक रूप से खुशहाल हो सकें। उन्होंने कहा कि दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत-पाकिस्तान सीमा भी लोगों के लिए आसान आवाजाही का साधन बने। उन्होंने आशा जताई कि भविष्य में दोनों देशों में ऐसी सरकारें आएंगी जो लोगों के हित में सीमाओं पर पाबंदियां घटाने और दोस्ती व व्यापार को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाएंगी।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वह बांग्लादेश-भारत-पाकिस्तान पीपल्स फोरम के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और लंबे समय से भारत-पाकिस्तान के बीच शांति और दोस्ती के लिए प्रयास करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले भी कई सामाजिक कार्यकर्ता, पूर्व जज और वरिष्ठ पत्रकार अटारी-वाघा सीमा पर मोमबत्तियां जलाकर अमन और शांति की प्रार्थना करने पहुंचते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान की असली प्रगति युद्ध के ज़रिए नहीं हो सकती। हिरोशिमा और नागासाकी की त्रासदी का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों से होने वाली तबाही की कल्पना भी भयानक है। दोनों देशों के पास परमाणु हथियार होने के कारण युद्ध की स्थिति में होने वाले नुकसान का अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है। इसलिए किसी भी विवाद का हल बातचीत और कूटनीतिक तरीके से किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युद्ध पर खर्च होने वाला पैसा अगर शिक्षा और रोज़गार पर खर्च किया जाए तो दोनों देशों के नौजवानों का भविष्य बेहतर बनाया जा सकता है। 1947 से पहले दोनों तरफ के लोग आपस में जुड़े हुए थे और आज भी दोनों देशों की जनता में सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्तों की भावना मौजूद है। डिजिटल युग में सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों के ज़रिए दोनों देशों के लोग एक-दूसरे के विचारों और गतिविधियों को जान सकते हैं और शांति का संदेश दुनिया तक पहुंचा सकते हैं।
भारतीय सेना की भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में सेना का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। देशवासी सेना के जवानों की बहादुरी और कुर्बानी के कारण सुरक्षित जीवन व्यतीत करते हैं। सेना का काम देश की रक्षा करना है, जबकि युद्ध या सेना के उपयोग संबंधी राजनीतिक फैसला सरकारों द्वारा लिया जाता है। प्रवक्ता ने नागरिक समाज और नौजवानों से अपील की कि वे नफ़रत और टकराव के बजाय शिक्षा, हुनर और रोज़गार को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की असली खुशहाली हथियारों और युद्ध में नहीं, बल्कि अमन, व्यापार, शिक्षा, रोज़गार और आपसी भाईचारे में है। आने वाली पीढ़ी के लिए शांतिपूर्ण और बेहतर भविष्य बनाने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद और दोस्ती को लगातार मजबूत करने की ज़रूरत है।
