पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए नागरिकों से भागीदारी की अपील
ऊना,सुशील पंडित: भारतीय डाक विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर ‘ढाई अक्षर पत्र लेखन प्रतियोगिता-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य नागरिकों में पत्र लेखन की परंपरा को प्रोत्साहित करना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। प्रतियोगिता दो श्रेणियों में आयोजित की जा रही है। पहली श्रेणी 18 वर्ष तक की आयु के प्रतिभागियों के लिए तथा दूसरी श्रेणी 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभागियों के लिए निर्धारित की गई है।
डाकघर ऊना मंडल के अधीक्षक बलवीर चंद ने बताया कि प्रतियोगिता का आयोजन 31 अक्टूबर तक किया जा रहा है। इस वर्ष प्रतियोगिता का विषय “धरती माता को पत्र : प्रकृति की रक्षा का मेरा वादा” रखा गया है। यह विषय नागरिकों, विशेषकर विद्यार्थियों और युवाओं को प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी व्यक्त करने का अवसर प्रदान करेगा।
अधीक्षक ने बताया कि प्रतिभागी अपनी प्रविष्टियां ए-4 आकार के कागज पर अधिकतम 1000 शब्दों में अथवा अंतर्देशीय पत्र पर अधिकतम 500 शब्दों में हिंदी, अंग्रेजी अथवा स्थानीय भाषा में लिख सकते हैं। केवल हस्तलिखित प्रविष्टियां ही स्वीकार की जाएंगी। प्रविष्टियां मुख्य पोस्टमास्टर जनरल, हिमाचल प्रदेश डाक सर्किल, एसडीए कॉम्प्लेक्स, कासुम्पटी, शिमला-171009 के पते पर भेजी जानी हैं। साथ ही, प्रविष्टियां जमा करवाने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित की गई है।
बलवीर चंद ने बताया कि प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को आकर्षक नकद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले को 25 हज़ार रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले को 10 हज़ार रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले को 5 हज़ार रुपये की नकद राशि देकर सम्मानित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय स्तर पर चयनित प्रतिभागियों को प्रथम पुरस्कार 50 हज़ार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 25 हज़ार रुपये तथा तृतीय पुरस्कार 10 हज़ार रुपये प्रदान किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी वर्ग अपनी प्रविष्टियां विद्यालय प्रमुखों के माध्यम से डाक मंडल कार्यालय, ऊना में भी जमा करवा सकते हैं। उन्होंने विद्यालय प्रमुखों, अध्यापकों और अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को इस रचनात्मक एवं प्रेरणादायक प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि पत्र लेखन की समृद्ध परंपरा के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके।