चंडीगढ़: मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर प्रबंधन और मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएमएचए) को सशक्त बनाने की प्रक्रिया अधीन है।
भगवंत मान सरकार का यह कदम मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विनियमन के लिए एक व्यापक ढाँचा सुनिश्चित करेगा, पूरे पंजाब में बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का विस्तार करेगा और राज्य के प्रमुख नशा-विरोधी अभियान ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ की गति को बनाए रखने में मदद करेगा। इस व्यवस्था में जिलों के लिए मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड (एमएचआरबी) भी शामिल हैं। प्रत्येक बोर्ड की अगुवाई जिला न्यायाधीश या योग्य न्यायिक अधिकारी द्वारा की जाती है। ये बोर्ड प्रवेश और उपचार संबंधी निर्णयों की स्वतंत्र समीक्षा, शिकायतों और अधिकारों के उल्लंघन संबंधी सुनवाई, अग्रिम निर्देशों और नामित प्रतिनिधियों की समीक्षा तथा आवश्यकता पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण भी करते हैं।
राज्य के प्रमुख अभियान ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ के शुरू होने के बाद मौजूदा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में तेजी आई है। एसएमएचए इन सभी प्रयासों को एक मजबूत प्रबंधन के अधीन लाएगा और यह सुनिश्चित करेगा कि रोगियों को निर्धारित राष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार उपचार और देखभाल मिले। इस संबंध में पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “एसएमएचए में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम में वर्णित अनुसार समुदाय के लोगों की भागीदारी से मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों की आत्मनिर्भरता, सम्मान और कानूनी अधिकारों की और बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसमें नशे की लत से जूझ रहे लोग भी शामिल हैं।”
उन्होंने कहा, “राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के पुनर्गठन से पंजाब एक ऐसी रोगी-केंद्रित और अधिकार-आधारित मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली तैयार करने को प्राथमिकता दे रहा है, जो अधिक जवाबदेह हो और राज्य भर में मानसिक स्वास्थ्य एवं नशा-मुक्ति सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने में सक्षम हो।”