फिरोजपुरः जिले के गांव अली के में कुछ ऐसी दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जहां मां-बाप के साए से महरूम दो बेटियां और एक बेटा कच्चे मकान में रहने को मजबूर हैं। मां-बाप की मौत के बाद बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी अब बूढ़ी दादी के कंधों पर है, जो मुश्किल हालातों में बच्चों का पालन-पोषण कर रही है। परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब बच्चों के मां-बाप की मौत हो गई। मां-बाप के जाने के बाद घर चलाना मुश्किल हो गया है। अब तो हालात ऐसे बन चुके हैं कि कच्चे मकान में हर वक्त बच्चों के सिर पर मौत का खतरा मंडराता रहता है।
कच्चा मकान गिरने के कगार पर है। बारिश के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। बूढ़ी दादी अपनी क्षमता के अनुसार दोनों पोतियों और एक पोते की देखभाल कर रही है। इस उम्र और आर्थिक तंगी के कारण वह बेबस नजर आ रही है, क्योंकि बच्चों के पिता को 6 महीने पहले एक गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया था और पैसों की कमी के कारण उनका इलाज नहीं हो सका और उनकी मौत हो गई। छोटे बच्चों की मां मेहनत-मजदूरी करके अपने बच्चों को पाल रही थी। बच्चों की मां घर में काम कर रही थी और जब वह मोटर पर पानी भरने गई तो उसे भी करंट लग गया, जिससे उसकी भी मौत हो गई।
परिवार के पास न तो पक्का मकान है और न ही आय का कोई पक्का साधन, जिस कारण रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल बना हुआ है। परिवार की मांग है कि सरकार और प्रशासन उनकी मदद के लिए आगे आए, ताकि बेटियों को सुरक्षित छत और अच्छी शिक्षा मिलकर बेहतर भविष्य मिल सके। इलाके के लोगों का भी कहना है कि इस परिवार को तुरंत सरकारी सहायता दी जानी चाहिए। अब देखना यह होगा कि इस परिवार की मदद की गुहार प्रशासन और सरकार तक कब पहुंचती है और कब इन मासूम बच्चों को बेहतर जिंदगी और सिर पर रहने के लिए छत मिलेगी।