नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच में बातचीत की कोशिश शुरु होने के बाद भी अब पाकिस्तान के साथ विवाद को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। बीते दिन अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात का खुलासा किया है कि ईरान साथ उनकी बातचीत की पहल सिर्फ उनके ही कहने पर हो रही है। इसमें अब सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर की अहम भूमिका रही है। खास बात यहां पर यह है कि ट्रंप ने इस बार पाकिस्तान का कोई भी नाम ही नहीं लिया है।
ईरान ने ट्रंप से बात होने का दावा किया खारिज
ट्रंप ने यह साफ कह दिया है कि सऊदी अरब, यूएई, कतर ने अमेरिका को ईरान पर बड़े सैन्य हमले से पीछे हटने और बातचीत का रास्ता अपनाने के लिए कह देना चाहिए। उनके अनुसार अब बातचीत के दौरान होर्मुज स्ट्रेट को पिर से खोल देना चाहिए और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हुए मुद्दों का हल ढूंढना चाहिए। इसके अलावा ईरान ने ट्रंप के साथ सीधे बातचीत करना भी शुरु करने के दावे को खारिज कर दिया है। ट्रंप का यह कहना है कि अभी तक फिलहाल उनकी बात ओमान में होर्मुज में जहाजों के आने-जाने को लेकर हो रही है।
पाकिस्तान हुआ मध्यस्थता से बाहर
बता दें कि जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच में समझौता हुआ था। जिसके बाद पाकिस्तान और कतर को औपचारिक तौर पर मध्यस्थ पक्ष का बताया गया था। कतर के विदेश मंत्रालय ने यह कह दिया था कि वो पाकिस्तान की अगुवाई वाली मध्यस्थता का समर्थन करने वाला है। 22 जून को स्विटजरलैंड के बर्गेनस्टॉक में हाई लेवल मीटिंग हुई। इसके बाद अमेरिका और ईरान के साथ-साथ कतर और पाकिस्तान दोनों ही मथ्यस्थ पक्ष के तौर पर शामिल हुए थे। उस परमाणु मुद्दे, प्रतिबंधों और आगे की बातचीत के लिए मंच बनाने पर भी चर्चा हो चुकी थी।
इसके अलावा पाकिस्तान की यह भी समस्या है कि वह एक ओर ईरान के साथ अपने भौगोलिक, धार्मिक-सामाजिक रिश्तों का फायदा उठा सकता है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका और सऊदी अरब के साथ उसके रणनीतिक रिश्ते भी हैं। संतुलन उसकी मध्यस्था को मुश्किल बनाता है। यह भी ध्यान रखना जरुरी है कि जून में खुद ट्रंप ने पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता को बातचीत आगे बढ़ाने में मददगार बताया था।
ट्रंप के ताजा बयान के बाद अब पाकिस्तान के लिए जरुर एक कूटनीतिक झटका दिख सकता है परंतु तस्वीर अभी पूरी तरह से साफ नहीं है। दोहा और मस्कट इस समय बातचीत के अहम केंद्र बनते दिख रहे हैं। वहीं पाकिस्तान की भूमिका पर्दे के पीछे या अगले दौर की बातचीत के बाद ही सामने आएगी।