नई दिल्लीः एनआईए ने गुजरात के सलाया बंदरगाह पर पाकिस्तान से तस्करी कर लाई गई 500 किलोग्राम हेरोइन के मामले में 4 तस्करों के खिलाफ छठा पूरक आरोप पत्र दाखिल किया। एनआईए के प्रवक्ता के अनुसार अहमदाबाद स्थित विशेष एनआईए अदालत में चार आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, एनडीपीएस एक्ट और यूएपीए के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है। आरोप पत्र में नामजद चारों आरोपी हरमिंदर सिंह उर्फ रोमी रंधावा, मंजीत सिंह उर्फ मन्ना, कुलदीप सिंह और मलकीत सिंह पंजाब के रहने वाले हैं। जांच से पता चला है कि आरोपियों ने यह खेप पंजाब के विभिन्न स्थानों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने नशीले पदार्थों से हुई आय का इस्तेमाल आतंकवादी एवं आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने में किया। इस मामले में अब तक 24 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि नौ फरार हैं।
फरार आरोपियों में इटली में रह रहा भारत का वांछित तस्कर सिमरनजीत सिंह संधू, पाकिस्तान में रह रहे वांछित आरोपी हाजी साहब उर्फ भाईजान और नबी बख्श और ऑस्ट्रेलिया में रह रहा तनवीर सिंह बेदी शामिल हैं। एनआईए इन वांछित अपराधियों और गिरफ्तार आरोपियों के संबंध का पता लगाने में कामयाब रही है। जांच एजेंसी ने कहा कि इस मामले से समुद्री मार्ग का उपयोग करके पाकिस्तान से भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी की एक बड़ी आपराधिक साजिश का खुलासा हुआ। इस खेप को दिल्ली के रास्ते पंजाब में तस्करी के जरिये ले जाया जा रहा था।
इसे गुजरात के बंदरगाह पर उतरने के बाद यहां लाया गया था। एनआईए की जांच के मुताबिक हरमिंदर सिंह और मंजीत सिंह ने बेदी के कहने पर तस्करी कर लाए गए पदार्थों के भंडारण के लिए पंजाब के लुधियाना में गोदाम और मकान किराये पर लिए थे। कुलदीप ने मलकीत सिंह के साथ मिलकर एक अन्य आरोपी सुखबीर सिंह उर्फ हैप्पी की संदेह और पुलिस जांच से बचाने के साथ दिल्ली से लुधियाना और अमृतसर तक कई बार हेरोइन से भरे वाहनों को ले जाने में सहायता की थी। बोलेरो वाहन फतेहगढ़ साहिब जिले के एक गुरुद्वारे के नाम पर पंजीकृत था। यह मामला 12 अगस्त 2018 को गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते ने दर्ज किया गया था, जब आरोपी अजीज अब्दुल से हेरोइन की खेप पकड़ी गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 29 जून 2020 को इसकी जांच एनआईए को सौंपी थी।