चंडीगढ़: हरियाणा में वर्ष 2021 की तुलना में वर्ष 2025 में धान की पराली जलाने की घटनाओं में 91 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। राज्य में निर्धारित मानकों के अनुसार आवश्यक 81 बड़ी एवं मध्यम यांत्रिक रोड स्वीपिंग मशीनों में से 78 तैनात की जा चुकी हैं, जबकि 1,162 किलोमीटर चिन्हित सड़कों में से 675 किलोमीटर का पुनर्विकास कार्य पूरा कर लिया गया है। साथ ही, राज्य में 1,309 औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की निगरानी की जा रही है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने आज दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण प्रबंधन संबंधी उच्च स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में भाग लेने के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं में आई उल्लेखनीय कमी निरंतर निगरानी, प्रभावी प्रवर्तन तथा फसल अवशेष प्रबंधन उपायों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि पराली जलाने वाले हॉटस्पॉट क्षेत्रों में निगरानी को और मजबूत करने के लिए लगभग 50 ड्रोन तैनात किए जाएंगे। हॉटस्पॉट गांवों में कम लागत वाले पीएम 2.5 सेंसर लगाने का भी प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, जले हुए क्षेत्रों का जमीनी सत्यापन इसरो द्वारा विकसित मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से किया जाएगा।
राज्य में 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले 3,211 सक्रिय निर्माण एवं विध्वंस स्थलों को निगरानी वेब पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण संबंधी मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कैमरों तथा पार्टिकुलेट मैटर सेंसर के माध्यम से निगरानी को मजबूत किया जा रहा है।