चंडीगढ़: हरियाणा के वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस और वन महोत्सव प्रदेश के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुए हैं। लोगों ने पौधारोपण को जन आंदोलन का रूप देकर न केवल पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की, बल्कि प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का भी परिचय दिया है। उन्होंने प्रदेशवासियों का आभार व्यक्त करते हुए सभी से ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘एक पेड़ अपने नाम’ के तहत कम से कम दो पौधे लगाने और उन्हें बड़ा पेड़ बनने तक संरक्षित करने का आह्वान भी किया है।
मानसून पौधारोपण और बीजारोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। हमारा लक्ष्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनकी नियमित देखभाल कर उन्हें वृक्ष बनाना होना चाहिए। जिस प्रकार एक मां अपने बच्चे की शुरुआती वर्षों में देखभाल करती है, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को अपने लगाए पौधे की 5-6 वर्षों तक देखभाल अवश्य करनी चाहिए।
जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने गंभीर चुनौती बन चुका है। इसी चुनौती से निपटने के लिए हरियाणा सरकार ने पहली बार 100 करोड़ रुपये के ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंस फंड का बजटीय प्रावधान किया है। प्रदेश में 2 करोड़ 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि कैंपा योजना के तहत अतिरिक्त 20 लाख पौधों के रोपण को भी मंजूरी दी गई है।
वर्ष 1950 से शुरू हुआ वन महोत्सव आज पर्यावरण संरक्षण का राष्ट्रीय अभियान बन चुका है। इस वर्ष 77वें वन महोत्सव और विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्य और जिला स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में लोगों की व्यापक भागीदारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हरित भारत के संकल्प को नई मजबूती प्रदान की है। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में हरियाणा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और इसी उद्देश्य से राज्य सरकार विकसित हरियाणा दस्तावेज़ के अनुरूप वर्ष 2030 तक की कार्ययोजनाएं तैयार कर रही है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार पर्यावरण संरक्षण, हरित ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन और जलवायु-अनुकूल विकास को प्राथमिकता दे रही है। सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण और बेहतर जीवन देना भी है। प्रस्तावित ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंस फंड के माध्यम से शून्य-उत्सर्जन वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, शहरी हरितीकरण, जलवायु-अनुकूल कृषि और प्रकृति-आधारित समाधानों को बढ़ावा मिलेगा। इससे प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नवाचार और निवेश को भी नई गति मिलेगी।