नई दिल्ली: रुस की ओर से भारत तक पहुंचने के लिए अब नए रेल कॉरिडोर की संभावना पर विचार करने की बात कह दी है। इस रुट का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर तक वैकल्पिक ग्राउंड कनेक्टिविटी को विकसित करना है। इसका अर्थ है कि समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो पाए। यह विचार एक ऐसे समय पर सामने आया है जब होर्मुज और बोस्फोरस जैसे कि रणनीतिक समुद्र मार्गों से जुड़े जोखिम बढ़ चुके हैं। इसके अलावा ग्लोबल शिपिंग और एनर्जी मार्केट पर दबाव बन चुका है।
हिंद महासागर तक लिंक संभावना पर होना चाहिए विचार
रुस के उप प्रधानमंत्री मराट खुसनुलिन ने गुरुवार को एक न्यूज एजेंसी ने कहा कि हिंद महासागर तक रेल लिंक की संभावना पर विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बोस्फोरस और होर्मुज जैसी समुद्री मार्गों से जुड़े जोखिम वैकल्पिक परिवहन मार्गों की जरुरत पैदा कर सकते हैं। खुसनुलिन के अनुसार, संभावित लैंड रुट तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होकर गुजर सकते हैं। उनका यह कहना है कि भारत तक पहुंच देने वाला कोई भी ऑप्शन रुस के लिए भी स्वीकार्य हो सकता है।
होर्मुज संकट के चलते बढ़ी वैश्विक चिंता
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते हुए तनाव को देखते हुए अब वैक्लिपक जमीनी मार्ग की जरुरतें और खास बन चुकी हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े हुए संघर्ष ने इस समुद्री रास्ते से होने वाले व्यापार की संवेदनशीलता को सामने लाकर दिया है। ईरान के अधिकारियों की ओर से अमेरिका, इजरायल और उनके साथियों से जुड़े जहाजों की पहुंच सीमित करने की बात भी सामने आ चुकी है। ऐसे माहौल में रुस के लिए रेल कॉरिडोर भारत तक माल और एनर्जी उत्पादों की आवाजाही के लिए एक एक्स्ट्रा ऑप्शन बन सकता है।
पश्चिमी देशों पर अभी तक बना है दबाव
रुस पर पश्चिमी देशों का आर्थिक और कारोबारी दबाव भी लगातार बना हुआ है। अमेरिका की ओर से अब रुस और उससे पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों पर भी एक्स्ट्रा प्रतिबंध लगाने की कोशिशों के बीच भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों पर भी संभावित असर को लेकर चर्चा चल रही है। वहीं भारत तक वैकल्पिक जमीनी कनेक्टिविटी रुस के लिए सिर्फ ट्रांसपोर्टेशन आसान बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट ही नहीं बल्कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और समुद्री मार्गों से जुड़े हुए जोखिमों के बीच रणनीतिक ऑप्शन भी हो सकती है।
अभी नहीं शुरु हुआ रेल लिंक के ऊपर विचार
हिंद महासागर तक नए रेल लिंक का विचार इस समय शुरुआती स्तर पर है। यह साफ नहीं है कि यह रुस किस रुट, इन्वेस्टमेंट मॉडल और डेडलाइन के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते भारत तक पहुंच बनाने में कई भौगोलिक, राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियां भी है। ऐसे में नजर इस बात पर अटकी है कि इस प्रस्ताव को औपचारिक परियोजना में बदलने के लिए किन देशों के साथ बातचीत शुरु करनी चाहिए। भारत तक वैक्लिपक रेल कनेक्टिविटी को लेकर आगे क्या कदम उठा सकते हैं।