Sat, Jan 03, 2025, 20:57:41 PM
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क्या Gaza Peace Summit में शामिल होंगे PM Modi? मिस्न के राष्ट्रपति ने भेजा न्यौता

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नई दिल्ली: मिस्न के राष्ट्रपति फराह अली सिसी ने पीएम मोदी को गाजा शांति समझौते पर हस्ताक्षर के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए निमंत्रण भेजा है। यह शांति शिखर सम्मेलन मिस्न के शर्म अल शेख शहर में होने वाला है। यह एक मशहूर रिसॉर्ट शहर है जो कि अंतरराष्ट्रीय बैठकों के लिए जाना जाता है। इस समारोह में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ-साथ दुनिया के 20 नेता शामिल होने वाले हैं। भारत की ओर से यह पहले तय है कि विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह मिस्न जाएंगे। वो भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे हालांकि अभी तक ये साफ नहीं है कि पीएम मोदी मिस्न जाएंगे या नहीं।

शांति प्रक्रिया का हिस्सा बनेगा भारत

भारत ने हमेशा से ही शांति और संयम का समर्थन किया है। ऐसे में भारत के इजरायल और फिलिस्तान दोनों देशों के साथ संबंध अच्छे हैं ऐसे में भारत का इस शांति प्रक्रिया में हिस्सा लेना जरुरी है। गाजा में लंबे समय से इजरायल और हमास के बीच में संघर्ष चल रहा था। इस युद्ध में हजारों लोग मारे गए और काफी तबाही भी हुई। ऐसे में अब दोनों पक्षों के बीच में शांति समझौता हो रहा है। इस शांति समझौते पर अब ऑफिशियल तौर पर हस्ताक्षर होंगे इसलिए मिस्न में यह कार्यक्रम रखा गया है।

ट्रंप के पीस प्लान में शामिल कई चीजें

ट्रंप ने अपनी जो 20 सूत्रीय योजना बनाई है इसमें युद्धविराम, सेना की वापसी, बंधकों की रिहाई और स्थायी शांति जैसे मुद्दे शामिल हैं। ट्रंप के प्लान के मुताबिक, इजरायल और हमास दोनों को लड़ाई बंद करनी पड़ेगी। इजरायल को गाजा पट्टी से अपनी कुछ सेना वापिस बुलानी पड़ेगी। दोनों ओर के कैदियों और बंधकों को छोड़ना पड़ेगा। गाजा में लंबे समय तक शांति बनाए रखना भी इसमें शामिल है।

हमास के नेताओं ने जताई आपत्ति

हमास ने इस प्लान को मानने से मना कर दिया है। हमास के नेताओं ने इसको बेतूका बताया है। उनका कहना है कि वह अपने हथियार को नहीं छोड़ेंगे और न ही गाजा छोड़कर जाएंगे। हमास को यह लगता है कि यह समझौता उनके लिए खतरनाक है। इजरायल के पीएम नेतन्याहू भी इस समझौते को लेकर आश्वस्त नहीं है। उन्होंने कुछ शर्तें रखी हैं और वो चाहते हैं कि हमास पूरी तरह से एक्टिव हो जाए।

वहीं डोनाल्ड ट्रंप का यह मानना है कि यह प्लान मध्य पूर्व में स्थायी शांति लाने का सबसे अच्छा तरीका है परंतु अभी कई राजनीतिक और सुरक्षा समस्याएं हैं जिनको हल करना पड़ेगा।

 

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