बद्दीसचिन बैंसल: शीतलपुर के साथ लगते नाले में बारिश के पानी आने से मलबा स्कूल में घुस गया। जिससे स्कूल के शौचालय व कीचन मलबे ले भर गए। इसके अलावा दो पुराने कमरो में भी मलबा भर गया। इससे जहां बच्चों के खाना दूसरे बिल्डिंगके बरामदे में बनाना पड़ा वहीं बच्चों को खुले में शौच करना पड़ा।
प्राथिमक स्कूल शीतलपुर के पीछे एक बरसाती नाला बहता है। इस नाले में हर साल पानी तेज आने पर मलबा स्कूल भवन में भर जाता है। जिससे पूरे स्कूल भवन में कीचढ़ आने से पठन पाठन कार्य प्रभावित होता है। स्कूल प्रंबधन हर साल इसे पीटीए के माध्यम से साफ कराता है। हालांकि बच्चों की कक्षाएं नई बिल़्डिंग में लगती है। इससे पढ़़ाई तो बाधित नहीं हुई लेकिन कीचन में शौचालय में मलबा भरने से जहां बच्चों को मिड डे मिल के तहत भोजन बनाने में दिक्कत आई वहीं बच्चों को खुले में शौच करना पड़ा।
रात्रि के दौरान मलबा आने से सुबह जब स्कूल खुला तो पूरे स्कूल में मलबा भरा हुआ था। स्कूल के अध्यापक जगदीश ने पीटीए की आपात बैठक अध्यक्ष सीमा रानी की अध्यक्षता में बुलाई और प्रस्ताव पारित करके इसकी सफाई के लिए सीएचटी व बीपीईओ को भेजा गया। शिक्षक ने बताया कि हर वर्ष बारिश के दौरान यहां पर मलबा आता है। पिछले बार दो बार आया लेकिन इस बार पहली बार मलबा आया है।
ग्रामीण देश राज, देवी राम, ज्ञान चंद, कमलेश कुमारी, रामलाल, चिंतन, राज रानी, पल चंद, शिव कुमार व आशा रानी ने बताया कि लोग लंबे समय से इस नाले की तट्टीय करण व डंगा लगाने की मांग कर रहा है, लेकिन तो पंचायत न ही प्रशासन यहां पर लोगों को सूध ले रहा है। इससे स्कूल व गांव के लोगों को उपजाऊ जमीन को खतरा बना हुआ है।
अध्यापक जगदीश ने बताया कि स्कूल में 51 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते है। जिन्हें नई बिल्डिंग में बैठाया गया। पुरानी बिल़्डिगं में हर साल मलबा भरता है। जिसे साफ करने के लिए उनके पास बजट का कोई प्रावधान नहीं होता है। एसएमसी के माध्यम से इसका मलबा हटाया जाता है। उन्होंने इस बारे में सीएचटी व बीपीईओ को अवगत करा दिया गया है।
