बंगाणा में 75 पेटियां बरामद
ऊना/सुशील पंडित: अंधाधुंध चोरियों से परेशान ऊना वासियों की रक्षा के लिए तैनात ऊना पुलिस आजकल शराब के मामलों में व्यस्त है। इस समय पुलिस बल शराब के अवैध भंडारण के खिलाफ कार्रवाई में जुटा है। अरबों रुपए में ठेकों की नीलामी के बाद बची शराब का भंडारण जोरों पर है। किसी से दर्जनों पेटियां मिल रही हैं तो कोई 5-7 बोतलें ले जाता भी पकड़ा जा रहा है।
उप मंडल बंगाणा में तो पिछले दो दिन में 75 पेटी से अधिक शराब पकड़ी जा चुकी है। इसमें व्हिस्की, बियर, पूरी बोतल, अधिया और क्वार्टर तक शामिल हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार शाम को बंगाणा के तूतड़ू में पिकअप ट्राला संख्या (एचपी 36-3668) से महंगे अंग्रेजी ब्रांड की बोतलें और क्वार्टर बरामद हुए हैं। इनमें रॉयल स्टैग व अन्य ब्रैंड की सैकड़ों बोतलें, क्वार्टर और अधिए, बियर की बोतलें और कैन शामिल हैं। इस एक वाहन में ही पुलिस को 72 पेटी अवैध शराब बरामद करने में सफलता हासिल हुई है। उपरोक्त मामले में पिरथीपुर निवासी राज कुमार पुत्र फतेह सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कार्रवाई की जा रही है।
इसके अलावा भी ऊना में कई जगहों पर अवैध शराब की बोतलें बरामद हुई हैं। इनमें बंगाणा की ही जसाना पंचायत के समलाड़ा गांव में गोल्डी के घर से अंग्रेजी शराब की 22 और देसी की 12 बोतलें, ऊना के गलुआ निवासी विकास कुमार से हमीरपुर रोड़ पर देसी शराब की 7 बोतल, ऊना के ही गुरुसर मोहल्ले में राजेश कुमार के घर से देसी शराब की 30, सन्तोषगढ़ बाजार में जसविंदर की दुकान से देसी शराब की 07, अम्ब के कुठेड़ा खैरला गांव में हरजीत कुमार से देसी शराब की 10 बोतलें और डीएवी स्कूल के पास गणेश कुमार की दुकान से भी देसी शराब की 07 बोतलें बरामद हुई हैं।
शराब को बढ़ाने में सरकारों का अहम योगदान
राष्ट्र को दिशा दिखाने के लिए हमारे संविधान में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों का विशेष प्रावधान है। एक राष्ट्र के रूप में भारत भविष्य में कैसे आगे बढ़ेगा उसे देखते हुए संविधान निर्माताओं ने इन नीति निर्देशक तत्वों में कई अहम बातें कही हैं। इसके तहत भारत में धीरे धीरे शराब की उपलब्धता को कम किया जाना भी शामिल है। मगर आज संविधान के उलट अधिकतर राज्य सरकारें शराब बिक्री को और ज्यादा सुलभ बनाती जा रही हैं। ऊना जैसा जिला आज शराब में नहा रहा है। आज जगह जगह शराब की दुकानें खोलकर उससे पैसा कमाना हमारी सरकारों का एक अहम लक्ष्य बन गया है। कोरोना काल में शराब को लेकर सरकारों की ललक किसी से छिपी नहीं है। आज जिस तरह से देवभूमि में शराब की नदियां बह रही हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले दौर में शराब दूध की तरह हर गली नुक्कड़ में बिका करेगी। हालांकि दो नंबर में शराब का कारोबार हमारे घर द्वार तक इसकी उपलब्धता करवा चुका है। आज नई पीढ़ी शराब को किसी अन्य शरबत की भांति देखने लग गई है। जो कभी सामाजिक बुराई थी आज सरकारों की आय का सबसे बड़ा साधन बनती जा रही है। शराब की होड़ का कोई अंत हमें निकट भविष्य में दिखाई नहीं देता।
