नई दिल्ली: बीते दिन यूरोप समेत दुनिया भर के कुछ एयरपोर्ट्स पर साइबर अटैक हुआ। इस साइबर अटैक के कारण कई लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा और नुकसान भी हुआ। साइबर अटैक के कारण से असल में ऑटोमैटिक होने वाला काम अचानक से ठप हो गया। इसके कारण कई लोगों की फ्लाइट्स रद्द हुई तो कुछ फ्लाइट्स ने देरी से उड़ान भरी।
एयरपोर्ट पर ज्यादातर काम ऑटोमैटिक तरीके से ही होते हैं परंतु शनिवार को हीथ्रो एयरपोर्ट, बुर्सेल्स और बर्लिन पर एक साइबर अटैक के कारण एयरपोर्ट का चेक-इन सिस्टम ठप हो गया। इसके बाद यूरोप जैसे देशों को मैनुअल चेक-इन और बोर्डिंग लिस्ट भी लगानी पड़ी। साइबर हमलावर ने Muse नाम के सॉफ्टवेयर के साथ हमला किया जिसके कारण से एयरपोर्ट के कई काम ही ठप हो गए। यहां तक की कई एयरपोर्ट्स पर फ्लाइट्स ने भी देरी से उड़ान भरी और कुछ फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ी।
बीबीसी की रिपोर्ट्स के अनुसार, आरटीएक्स कंपनी ने कहा कि वे इस साइबर संबंधी समस्या की पहचान कर चुके हैं और कुछ समय के अंदर इसको ठीक भी कर लिया गया। कंपनी ने आगे बताया कि उनका Muse Softwar प्रभावित हुआ जिसे Collins Aerospace प्रोवाइड कराती है और ये कंपनी आरटीएक्स की सहायक कंपनी है।
क्या होता है म्यूज सॉफ्टवेयर?
ये म्यूज सॉफ्टवेयर एक पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम है। यह एयरलाइंस कंपनियों को एक ही चेक-इन गेट और बोर्डिंग गेट को इस्तेमाल करने की परमिशन देता है। सिंपल शब्दों में एयर लाइन्स कंपनियां एक ही हार्डवेयर सिस्टम के अंतर्गत चेक-इन और बोर्डिंग का काम पूरा कर लेती है।
म्यूज सॉफ्टवेयर की मदद से एयरलाइन्स कंपनियों को चेक-इन और बोर्डिंग करवाने के लिए अलग से कर्मचारियों की जरुरत नहीं होती। जब ये सिस्टम ठप हुआ तो इसकी क्षमता के अनुसार, मैनुअल चेक-इन का काम करने वाले कर्मचारी भी मौजूद नहीं थे। इसके बाद अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया।
इसके बाद लोगों को बोर्डिंग और चेक-इन जैसे कामों के लिए लंबी लाइन में भी लगना पड़ा। फिर कंपनियों को जल्दबाजी में कई काम मैनुअली तरीके से करने पड़े। फोन से मैनुअल बोर्डिंग लिस्ट बनानी पड़ी और इसी कारण कई लोगों को घंटों तक इंतजार भी करना पड़ा।
