नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग अब इस समय नए लेवल पर पहुंच गई है। अमेरिका ने जितना सोचा हुआ था उससे भी भयंकर तरीके से ईरान सऊदी दूतावास को डैमेज कर गया है। इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच जो तनाव पहले से बना हुआ था वो अब और भी ज्यादा गहरा हो गया है।
इस पूरी घटना का सच वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी दूतावास पर 3 मार्च को जो ड्रोन हमला हुआ था। उसमें पहले बताए गए नुकसान से कहीं ज्यादा तबाही हुई थी। यह हमला रात के करीब 1:30 बजे हुआ था। जब दो ईरानी ड्रोन दूतावास के सबसे सुरक्षित इलाके में जा घुसे हैं।
निशाना इतना सटीक था कि पहले ड्रोन ने दीवार से टकराकर जो छेद बनाया। दूसरा ड्रोन ठीक उसी रास्ते से अंदर घुस गया। इसके बाद वहां ऐसी भीषण आग लगी जो कुछ मिनटों नहीं बल्कि कई घंटों तक धधकती रही। इस हमले में दूतावास की तीन मंजिलों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा है। इसमें एक CIA स्टेशन भी शामिल बताया गया है। अधिकारियों का तो यहां तक कहना है कि दूतावास के कुछ हिस्से अब ऐसे हो गए हैं जिन्हें दोबारा ठीक करना भी मुश्किल है।
राहत की बात बस इतनी रही है कि हमला रात के समय हुआ जब वहां कम लोग थे। वरना यही हमला दिन के समय होता तो बहुत बड़ी तबाही हो सकती है। उस समय वहां सैंकड़ों कर्मचारी काम कर रहे होते और यह एक बड़ी जान-माल की हानि वाली घटना बन सकती थी। हैरानी की बात यह है कि शुरुआत में इस हमले को बहुत मामूली बताया गया था। कहा गया था कि बस छोटी मोटी आग लगी है लेकिन अब सामने आई जानकारी पूरी तरह अलग तस्वीर पेश करती है।
असल में बहुत सी बातें अब भी इस खबर के अनुसार, जो धीरे-धीरे सामने आ रही है। देखा जाए तो पिछले कुछ समय में मिडिल ईस्ट के अलग-अलग इलाकों में अमेरिका के कई दूतावासों और मिशनों को इसी तरह निशाना बनाया गया है। ईरान की ओर से बढ़ रहे ये खतरे अब वाशिंगटन के लिए बहुत बड़ी सिरदर्दी बन चुके हैं। कुल मिलाकर सऊदी अरब में जो हुआ वो सिर्फ एक धमाका नहीं था बल्कि अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी सेंध थी। अब जैसे-जैसे इस खबर की परतें खुल रही है। अमेरिकी की चिंताएं भी बढ़ती जा रही है। आने वाली दिनों में देखना होगा कि इस बड़े डैमेज के बाद अमेरिका अपनी सुरक्षा रणनीति में क्या बदलाव करता है। मिडिल ईस्ट की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।