चंडीगढ़ः पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के चाैथे दिन आज सदन में पवित्र ग्रंथों के खिलाफ अपराध रोकथाम विधेयक-2025 पर बहस हुई। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बेअदबी बिल पर कहा कि सभी के सुझावों को देखते हुए बिल को सेलेक्ट कमेटी भेजकर लोगों के सुझाव लिए जाने चाहिए। इसमें जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। हर धार्मिक जत्थेबंदी के सुझाव लेने चाहिए। इसके लिए समयसीमा तय की जानी चाहिए। सभी राजनीतिक पार्टी को उस कमेटी में प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। विधानसभा के विशेष सत्र के अंतिम दिन अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवा ने कहा कि समिति 6 महीने के भीतर विधेयक पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
इससे पहले विधायक राणा इंदर प्रताप सिंह ने बेअदबी बिल पर चर्चा के दाैरान कहा कि 10 साल की सजा काफी नहीं है, इसे उम्र कैद में बदलना चाहिए। साथ ही बेअदबी की कोशिश पर भी तीन साल सजा काफी नहीं है। इसे भी बढ़ाया जाना चाहिए। भाजपा विधायक अश्वनी शर्मा ने कहा कि सनातन धर्म में बहुत भी व्यापक ग्रंथ हैं। सभी सनातन ग्रंथों को इसमें शामिल किया जाना चाहिए। विपक्ष ने नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि बेअदबी पर तय सीमा में जांच करने का प्रावधान करनी चाहिए। 30 दिन का समय तय किया जाना चाहिए। अगर 30 दिन के अंदर जांच पूरी नहीं होती तो एसएसपी की अनुमति के बाद ही आगे 15 दिन का और समय दिया जाना चाहिए। इसके सिर्फ डीजीपी की अनुमति के बाद ही जांच का समय आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री मान ने सोमवार को सदन में बेअदबी विरोधी विधेयक पेश किया और कहा कि धार्मिक ग्रंथों के अपमान में शामिल लोगों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए। विधेयक पर चर्चा समाप्त करते हुए, उन्होंने 2015 में अकाली-भाजपा शासन के दौरान हुई बेअदबी की घटनाओं का जिक्र किया और कहा कि बेअदबी से बड़ा कोई अपराध नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य-विशिष्ट प्रस्तावित कानून को मंजूरी दी गई। सोमवार को कैबिनेट बैठक के बाद एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि इस विधेयक में गुरु ग्रंथ साहिब, भगवद गीता, बाइबिल और कुरान सहित पवित्र ग्रंथों के अपमान के लिए आजीवन कारावास तक की कड़ी सजा का प्रावधान है।