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Punjab News: Civil Hospital में डॉक्टर के साथ विवाद के मामले में जिम संचालक Ramesh Bangar पर FIR दर्ज, देखें वीडियो

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लुधियानाः सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों के साथ की गई बदसलूकी के मामले में पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। मिली जानकारी के अनुसार में करीब 4 दिन पहले हुई घटना को लेकर थाना डिवीजन नंबर 2 की पुलिस ने ईसा नगरी के एक जिम संचालक रमेश बांगड़ के खिलाफ अस्पताल में हंगामा करने और डॉक्टर को धमकाने के आरोप में केस दर्ज किया है। पुलिस ने अस्पताल की इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर की ओर से दी गई शिकायत और सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के आधार पर पूरा केस दर्ज किया है। फिलहाल इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी होनी बाकी है।

डॉक्टर अमनप्रीत सिंह ने बताया कि रविवार रात को कुछ लोग एक व्यक्ति को अस्पताल लेकर आए थे। उस मरीज की मौत हो चुकी थी। उनके साथ आए एक व्यक्ति ने अस्पताल में खूब हंगामा किया। उस व्यक्ति के हंगामे से मरीजों में डर पैदा हो गया। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और स्टाफ भी डरे हुए थे। महिला स्टाफ में उस व्यक्ति के खिलाफ काफी गुस्सा था। मृतक मरीज की मौत के बाद कई मेडिकल प्रक्रियाएं होती हैं जो स्टाफ को पूरी करनी होती हैं। जिसके बाद शव को शवगृह में ढककर रखना होता है। कई तरह के फॉर्म भरने होते हैं। इस काम में समय लगता है लेकिन इस बात को समझे बिना उक्त व्यक्ति ने अस्पताल का माहौल खराब कर दिया है। घटना वाले दिन ही एसएमओ को सूचित कर दिया गया था और तुरंत शिकायत भी दे दी गई थी।

बता दें कि रविवार की रात करीब 8 बजे अस्पताल की इमरजेंसी में जालंधर बाई पास के पास से एक सड़क हादसे में रिटायर्ड फौजी को लहूलुहान हालत में लाया गया था। जिसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस बीच रमेश बागड़ नामक व्यक्ति इमरजेंसी में आया और डॉक्टरों से बदसलूकी करने लगा। डॉक्टरों ने तुरंत मामले की जानकारी सीनियर मेडिकल अफसर और सिविल सर्जन को दी। जिसके बाद डॉक्टरों ने इसकी लिखित में शिकायत थाना डिवीजन 2 और पुलिस चौकी सिविल अस्पताल की पुलिस को दी। जिसके बाद पुलिस ने जांच के बाद आरोपी रमेश बांगड़ के खिलाफ सरकारी ड्यूटी में विघ्न डालने और डॉक्टरों को धमकियां देने के तहत मामला दर्ज किया।

दूसरी ओर, रमेश बांगड़ ने घटना वाली रात मीडिया को बताया कि जालंधर बाईपास के पास एक सड़क दुर्घटना हुई है। एक पुलिस अधिकारी एक घायल व्यक्ति को लेकर ऑटो में आ रहा था। मैं घंटाघर के पास था। पुलिस अधिकारी ने मेरी कार को जोरदार टक्कर मारी और कहा कि एक गंभीर मरीज है, कार पीछे हटाओ। बांगड़ के अनुसार, उन्होंने तुरंत उस मरीज को रास्ता दिया और अपनी कार ऑटो के पीछे लगा दी ताकि उस मरीज की मदद की जा सके। जैसे ही वह सिविल अस्पताल पहुंचे तो एक महिला डॉक्टर ने उनकी जांच की लेकिन उस मरीज की मौत हो चुकी थी।

बांगड़ ने कहा कि मेरे सामने करीब 8 से 10 और मरीज अस्पताल आए लेकिन उस समय वहां केवल एक डॉक्टर था। बांगड़ ने कहा कि उनके पास से एक डॉक्टर जा रहा था। उसने उनसे कहा कि डॉक्टर साहब इतने सारे मरीज हैं और एक ही डॉक्टर है, बाकी डॉक्टर कहां हैं। उस डॉक्टर ने कहा कि मुझे 8 बजे छुट्टी मिल गई है, इसलिए मैं जा रहा हूं। बांगड़ ने कहा कि अस्पताल में डॉक्टर कोट नहीं पहने हुए थे, इसलिए पता नहीं चल पाया कि डॉक्टर कौन है। बांगड़ के अनुसार उन्होंने खुद एसएमओ को फोन करके जानकारी दी। जिस डॉक्टर को भेजा गया था, उसने भी कोट नहीं पहना था। बांगड़ ने कहा कि अस्पताल में स्ट्रेचर की भी उचित व्यवस्था नहीं है। सिविल सर्जन, स्वास्थ्य मंत्री और विधायक को अस्पताल का औचक निरीक्षण करना चाहिए।

 

 

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