चंडीगढ़: पंजाब सरकार के कर्मचारियों के लिए डीए के मुद्दे पर चल रहे संघर्ष के बीच, सरकार और कर्मचारी संघों के बीच आज एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। दोनों पक्षों के बीच बैठक के बाद हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया गया। ऐसे में पंजाब में सरकारी मुलाजिमों ने हड़ताल खत्म कर दी है। इसके साथ ही सरकार द्वारा 27 अगस्त को जारी कारण बताओ नोटिस भी वापस ले लिया गया है। अब कर्मचारियों की जल्द ही सीएम भगवंत मान से मीटिंग होगी। कर्मचारियों ने मांगें न माने जाने पर 11 सितंबर तक सामूहिक छुट्टी लेकर हड़ताल जारी रखने का फैसला किया था। पहले सिर्फ 8 सितंबर को हड़ताल का ऐलान था।
जानकारी के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों के मुद्दों को लेकर आज सुबह से एक महत्वपूर्ण बैठक चल रही थी। मुख्य सचिव (सीएस) के साथ बैठक हुई जिसमें कर्मचारी संघों ने सरकार के समक्ष अपनी मांगों और चिंताओं को रखा। काफी चर्चा के बाद दोनों पक्षों में कई मुद्दों पर सहमति बनी। हड़ताल का आह्वान सरकारी कर्मचारियों ने किया है। इसके कारण सरकारी कार्यालयों में काम प्रभावित होने के साथ-साथ आम लोगों को अपने आवश्यक सरकारी काम कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस बीच, सरकारी कर्मियों ने हड़ताल पर जाने का फैसला किया था।
वहीं सरकार ने 27 अगस्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसका कर्मचारी संघों ने विरोध किया था। हालांकि, बैठक के बाद यह सामने आया है कि सरकार ने इस नोटिस को वापस ले लिया है। सरकार द्वारा लगातार कहा गया है कि कर्मचारियों से संबंधित मुद्दों को केवल बातचीत और टेबल टॉक के माध्यम से हल किया जा सकता है। अब हाल की बैठक में दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर चर्चा की गई और आने वाले दिनों में और निर्णय लिए जा सकते हैं। वहीं, मंगलवार को सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों पर ‘नो वर्क, नो पे’ लागू करने और गैरहाजिरी पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी थी। दरअसल, पत्र में कहा गया था कि दफ्तर से गैरहाजिर रहने वाले या काम ठप करने वाले कर्मचारियों को ‘अनधिकृत रूप से अनुपस्थित माना जाएगा। स्थापित सिद्धांतों के तहत जितने दिन या घंटे कर्मचारी काम नहीं करेंगे, उन्हें उस अवधि का वेतन नहीं दिया जाएगा।