नवांशहरः जिले में शादी में न बुलाने पर पुलिस कॉन्स्टेबल मनदीप ने जीजा की गोलियां मारकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान जीजा 40 वर्षीय गुरप्रीत उर्फ गोपी के रूप में हुई है। मिली जानकारी के अनुसार घटना के दौरान पुलिस कॉस्टेबल को उसकी पत्नी ने रोकने की भी कोशिश की लेकिन वह नहीं माना। इस दौरान उसने पत्नी के साथ ही मारपीट करनी शुरू कर दी। बताया जा रहा हैकि गुस्से में पहुंचे कॉन्स्टेबल के लिए जीजा के घर के दरवाजे नहीं खोले गए तो उसने बंद गेट पर ही 2 फायर कर दिए। घटना को अंजाम देने के बाद झाड़ियों में छुप गया। जैसे ही जीजा बाहर निकला तो उस पर 4 गोलियां मार दीं। मौके पर जीजा को बचाने के लिए पड़ोसन अर्चना मिश्रा पत्नी नीरज मिश्रा आगे आई, जिसकी टांग के आर-पास गोली निकल गई। महिला को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जांच में पता चला है कि पुलिस कॉन्स्टेबल एक जज का गनमैन था। घटना को अंजाम देने के बाद पुलिस कर्मी फरार चल रहा है।
मामले की जानकारी देते हुए पिता हुकम सिंह ने बताया कि देर रात को घर में झगड़ा करने के बाद मनदीप ने गुस्से में बहन मनजीत कौर के घर फोन किए। बहन और जीजा के फोन न उठाने पर और तैश में आ गया और अपनी गाड़ी उठाकर चला गया। इस दौरान वह अपनी सर्विस रिवॉल्वर भी साथ लेकर चला गया।: पिता हुकम सिंह ने कहा कि मनदीप के इस तरह गुस्से में जाने की सूचना बेटी मनजीत कौर को मिल गई थी। इसके चलते ही जब वह बंगा की MC कॉलोनी में जीजा गुरप्रीत उर्फ गोपी (40) के घर पहुंचा तो उसकी बहन घर से बाहर नहीं निकली। हमने मनदीप को समझाया भी था कि शादी में नहीं बुलाना बड़ी बात नहीं है।
इस तरह से गुस्सा होना ठीक नहीं है, लेकिन वह नहीं माना। हुकम सिंह के अनुसार मनदीप उनका बड़ा बेटा है। वह 2014 में पुलिस में भर्ती हुआ। उसका एक बेटा है, जो दिव्यांग है। कॉन्स्टेबल मनदीप के घर से गुस्से में निकलने और साथ में सर्विस रिवॉल्वर होने की बात बहन मनजीत कौर को पता चल गई थी। जब मनदीप 9 जनवरी को रात साढ़े 11 बजे घर के बाहर पहुंचा तो उसने पहले दरवाजा खटखटाया, लेकिन बहन को उसके इरादे ठीक नहीं लगे। उसने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद मनदीप और तैश में आ गया। उसने अपनी कार स्टार्ट की और गेट में दे मारी।
मनदीप की इस हरकत के बाद भी बहन और जीजा बाहर नहीं आए। इससे गुस्साए मनदीप ने वहां शादी में आए कुछ और लोगों की गाड़ियां तोड़ दीं। फिर भी बहन और जीजा बाहर नहीं निकले। उन्होंने हालात को देखते हुए तुरंत पुलिस को सूचना दे दी। गोलियों की आवाज आने पर आसपास के लोग घर के बाहर पहुंच गए। 15-20 मिनट बीत गए। बहन और जीजा को लगा कि शायद कॉन्स्टेबल वहां से चला गया। अब माहौल शांत है। इसी बीच उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी थी। पुलिस ने जल्दी पहुंचने के लिए उनसे लोकेशन मांगी थी। जीजा गुरप्रीत ने बाहर आकर लोकेशन और तोड़फोड़ के फोटो भेजने के लिए मोबाइल निकाला। एसएचओ सतनाम सिंह ने बताया कि गुरप्रीत से कॉन्स्टेबल मनदीप की छोटी बहन मनजीत कौर की शादी हुई थी। अब मनजीत कौर के जेठ की शादी थी।
इस शादी में उसने बड़ी बहन को तो बुला लिया, लेकिन भाई यानी कॉन्स्टेबल मनदीप को नहीं बुलाया। इससे वह नाराज हो गया। शादी में न बुलाने को लेकर मनजीत की भाई मनदीप से बहस भी हुई थी। मनदीप इस बात से भी नाराज था कि जब बड़ी बहन को बुलाया तो उसे क्यों नहीं बुलाया? अगर उसे नहीं बुलाना था तो फिर बड़ी बहन को भी नहीं बुलाती। कत्ल के लिए निकलने से पहले मनदीप बार-बार बहन मनजीत और जीजा गुरप्रीत को फोन कर रहा था। मगर, उन्होंने कॉल नहीं उठाई। इसको लेकर बहन मनजीत ने बताया कि शादी समारोह के बाद वह घर में आकर लेटे थे। थके हुए थे तो नींद आने लगी थी। भाई की बार-बार मेरे मोबाइल पर रिंग आ रही थी। इस पर बच्चों ने कहा कि मामा का फोन आ रहा है।
मैंने कहा कि सभी सो जाओ। उसने पी रखी होगी, इसलिए अब फोन करने से हट नहीं रहा। मेरे फोन के बाद पति के फोन पर फोन आने शुरू हो गए। उन्होंने भी नहीं उठाया। घर से पता चला कि वो हमारे पास आने के लिए निकला है। रात 11:30 बजे के करीब गेट पर जोरदार धमाका हुआ। भाई की आवाज से उसे पता चला कि वह गुस्से में है। मैंने अपने साथ पूरे परिवार को घर की पहली मंजिल पर चलने के लिए कहा और दरवाजा नहीं खोला। मेरे पिता और पति ने अपने-अपने फोन से पुलिस को सूचना दी। थोड़ी देर बाद पुलिस कर्मियों का फोन आया। बाहर अब शांति थी। पति बेटे के साथ घर की लोकेशन बताने के लिए जैसे ही घर से बाहर निकले तो भाई ने गोलियां चला दीं।