पठानकोटः जिले के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन धार्मिक स्थल आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक शांति का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय साधु के अनुसार, इस स्थान का संबंध पांडवों के अज्ञातवास और उनकी तपस्या से जुड़ा हुआ है। यहां जमीन के नीचे एक विशाल गुफा और गायत्री माता का प्राचीन मंदिर होने की बात भी कही जाती है। हालांकि, इस ऐतिहासिक दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां पहुंचने के बाद उन्हें अद्भुत आध्यात्मिक शांति और आनंद की अनुभूति होती है। वहीं, मंदिर परिसर में बिजली और श्रद्धालुओं के लिए शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर भी साधु ने प्रशासन और सरकार से सहयोग की अपील की है।
इस प्राचीन धार्मिक स्थल को लेकर साधु ने बताया कि उनके दादा गुरुदेव के अनुसार यह स्थान द्वापर युग से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां कुछ समय बिताया और यह स्थान उनकी तपोभूमि रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे दादा गुरुदेव बताया करते थे कि यह पांडवों की बनाई हुई गुफा है। द्वापर युग में पांडव यहां रुके थे और उन्होंने यहां अज्ञातवास काटा था। यह उनकी तपोभूमि है और उन्होंने यहां तपस्या की थी।” उन्होंने बताया इस स्थान के नीचे एक विशाल गुफा और गायत्री माता का प्राचीन मंदिर मौजूद है। उन्होंने बताया कि गुफा के अंदर काफी दूरी तक कमरे बने हुए हैं और उनके दादा गुरुदेव कुछ स्थानीय लोगों के साथ करीब 2000 फुट नीचे तक गए थे। नीचे बहुत बड़ी गुफा है और गायत्री माता का बहुत बड़ा मंदिर है।
नीचे जाने वाले रास्ते में कमरे भी बने हुए हैं। करीब 2000 फुट तक लोग गए हैं। हमारे दादा गुरुदेव भी चार स्थानीय लोगों को साथ लेकर नीचे गए थे और करीब चार घंटे बाद वापस आए थे। उन्होंने बताया कि उनके दादा गुरुदेव के अनुसार इस गुफा से आगे हरिद्वार और मुक्तेश्वर धाम की दिशा में रास्ता होने की मान्यता है। उन्होंने बताया कि यहां स्थापित गायत्री माता की प्रतिमा भी अपने आप में विशेष मानी जाती है। उनका दावा है कि इस तरह की प्रतिमा क्षेत्र में बहुत दुर्लभ है और श्रद्धालुओं की यहां गहरी आस्था है। उन्होंने बताया कि गायत्री माता की यहां बहुत बड़ी कृपा है। मुझे तो साक्षात माता के विराजमान होने का अनुभव होता है। मैं कहीं नहीं जाता, यहीं बैठकर भजन करता रहता हूं और माता जी अपने आप पूरी व्यवस्था कर देती हैं। किसी चीज की कमी महसूस नहीं होती।
उन्होंने बताया कि इस स्थान के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। उनका कहना है कि जो श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, उन्हें आत्मिक शांति और आनंद की अनुभूति होती है और वे प्रसन्न होकर वापस लौटते हैं। उन्होंने कहा कि यहां बहुत कम लोग आते हैं, क्योंकि करीब 90 प्रतिशत लोगों को इस जगह के बारे में जानकारी नहीं है। जो भी भक्त यहां आता है, उसको आत्मिक शांति और बहुत आनंद की अनुभूति होती है। लोग खुश होकर जाते हैं और कहते हैं कि ऐसा स्थान उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ इस स्थान पर सुविधाओं की कमी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। साधु ने बताया कि यहां बिजली की लाइन तो पहुंची है, लेकिन बिजली चले जाने के बाद कई-कई दिनों तक आपूर्ति बहाल नहीं होती। वहीं श्रद्धालुओं, खासकर महिलाओं के लिए शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने बताया कि यहां बिजली की तारें डाली गई हैं, लेकिन जब बिजली चली जाती है तो कई दिनों तक नहीं आती। श्रद्धालुओं के लिए शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है। महिलाएं जब यहां आती हैं तो उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने ने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि ऐसे प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के साथ-साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि अगर आप सब लोगों का सहयोग मिले तो यहां अच्छी व्यवस्था की जा सकती है। ऐसे प्राचीन देवी-देवताओं के स्थानों पर सरकार को भी सहयोग देना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।”