अमृतसरः आम आदमी पार्टी के अमृतसर जिले के प्रमुख प्रभवीर सिंह बराड़ ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चेयरमैनशिप के बदले पैसे लेने के आरोपों पर अपना पक्ष रख किया। बराड़ ने कहा कि उनके खिलाफ 50 लाख रुपये लेने के जो आरोप लगाए गए हैं, वह पूरी तरह बेबुनियाद हैं और यह सारा मामला एक साजिश के तहत उन्हें बदनाम करने के लिए बनाया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बराड़ ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से 2 वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल की गई हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि चेयरमैनशिप के बदले पैसे मांगे गए। उन्होंने कहा कि इस मामले की सच्चाई जानना बहुत जरूरी है क्योंकि यह सारा विवाद असल में कुछ लोगों द्वारा रची गई साजिश है।
बराड़ ने बताया कि पार्टी में भी अक्सर कुछ “काली भेड़ें” होती हैं जो निजी लाभ के लिए किसी को बदनाम करने का प्रयास करती हैं। उन्होंने कहा कि वे पिछले 10 साल से पार्टी के लिए मेहनत कर रहे हैं और अपनी लग्न के साथ यह जिम्मेदारी हासिल की है, न कि किसी की चापलूसी करके की गई है। इस दौरान वरुण भगत ने मीडिया के सामने आकर कहा कि यह सारा मामला असल में उनके और रविंदर डावर के बीच चल रहे व्यवसाय की लेनदेन से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने बताया कि वह पिछले 4 साल से डावर के साथ मिलकर कारोबार कर रहे थे और पैसे के लेन-देन को लेकर दोनों में वाद-विवाद हो गया। वरण भगत ने कहा कि कुछ लोगों ने उनसे कहा है कि वह बराड़ के खिलाफ भी वीडियो बनाकर आरोप लगाए ताकि बराड़ को जिला प्रमुख से हटा दिया जाए। उन्होंने कहा कि उन्हें डराया भी गया और उनके परिवार को पुलिस के माध्यम से परेशान किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बराड़ ने कहा कि इस मामले में पार्टी की ओर से जांच कराई जाएगी और जो भी लोग इस साजिश के पीछे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी एक आम कर्मियों की पार्टी है और यहां पद मेहनत के आधार पर मिलते हैं, पैसे के आधार पर नहीं।
विपरीत दिशा में रविंदर सिंह डावर अपनी पत्नी के साथ पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस पहुंच गया और उसने प्रभवीर बराड़ से मिलने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उसे अंदर जाने से रोक दिया। बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रविंदर डावर भावुक हो गया और रोते हुए बताया कि उसके साथ धोखा हुआ है। उसने आरोप लगाया कि उसने वरण भगत को पैसे दिए थे, जिन्हें प्रभवीर बराड़ को देने के लिए कहा गया था ताकि उसे चेयरमैन बनाया जा सके। डावर ने कहा कि न तो उसे चेयरमैनशिप मिली और न ही उसके पैसे वापस मिले, उल्टा उसकी बदनामी हो रही है। उसने आरोप लगाए कि वरण भगत को भी धमकाकर अपने साथ बिठाया गया है। रविंदर डावर ने सरकार और प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और न्याय की गुहार लगाई है।
