नई दिल्लीः देश में गैस संकट और आपूर्ति की कमी का फायदा उठाने वाले कालाबाजारियों पर क्राइम ब्रांच पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस ने बाहरी दिल्ली के मुंडका इलाके में चल रहे एक अवैध गैस भंडारण रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए गोदाम से 610 कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर बरामद किए हैं, जिन्हें सरकारी नियमों के विरुद्ध और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर जमा किया गया था। लेकिन गोदाम का मालिक कर्मचारी सहित फरार हो गया। डीसीपी संजीव यादव के मुताबिक सूचना के आधार पर टीम ने मुंडका स्थित गुरुजी इंडेन गैस सर्विस के गोदाम पर छापा मारा। टीम ने जांच के दौरान पाया गया कि गुरुजी इंडेन गैस सर्विस को केवल इंडेन कंपनी के कमर्शल एलपीजी सिलेंडर वितरित करने की अनुमति है, लेकिन गोदाम में इंडेन के अलावा भारत गैस और एचपी गैस कंपनियों के सिलेंडर भी बड़ी संख्या में रखे मिले, जो एलपीजी वितरण से जुड़े नियमों और लाइसेंस की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन हैं।
छापेमारी के दौरान कुल 610 सिलेंडर बरामद किए गए। इनमें इंडेन के 423, भारत गैस के 92 और एचपी गैस के 95 सिलेंडर शामिल हैं। इनमें भरे और खाली दोनों तरह के सिलेंडर मौजूद थे। शुरुआती जांच में स्टॉक रिकॉर्ड में भी बड़ी गड़बड़ी सामने आई। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के अधिकारियों से पुलिस को पता चला कि 10 मार्च 2025 तक डिस्ट्रीब्यूटर के पास इंडेन के कमर्शल सिलेंडरों का स्टॉक शून्य होना चाहिए था, जबकि मौके पर 133 भरे हुए सिलेंडर पाए गए। इससे अनियमितता और अवैध स्टॉक की आशंका बढ़ गईं। पुलिस के मुताबिक, इस तरह की अवैध जमाखोरी सप्लाई की कमी या संकट के दौरान की जाती है, ताकि बाद में सिलेंडरों को ऊंचे दामों पर ब्लैक मार्केट में बेचकर मुनाफा कमाया जा सके।
यह न केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि एलपीजी जैसे ज्वलनशील प्रोडक्ट को अनसेफ भंडारण से बड़ा हादसा होने का खतरा भी रहता है। छापेमारी के दौरान खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के फूड सप्लाई ऑफिसर विकास कुमार भी मौजूद रहे। उन्होंने पुष्टि की कि इंडेन डिस्ट्रीब्यूटर के परिसर में अन्य कंपनियों के सिलेंडर रखना नियमों के खिलाफ है। इस मामले में क्राइम ब्रांच थाने में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 7 और संबंधित धाराओं में दर्ज किया गया है। छापेमारी के समय गोदाम के मालिक मौके से फरार मिला। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध जमाखोरी और संभावित ब्लैक मार्केटिंग में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
